मुरादाबाद। कोरोना की दहशत के बीच मौसमी बदलाव से वायरल का कहर शुरू हो गया है। वायरल और कोरोना के अधिकतर लक्षण एक जैसे हैं। गले में दर्द और बुखार आने पर अधिकतर लोग डाक्टर के पास जाने के बजाए मेडिकल स्टोर भाग रहे हैं। मेडिकल स्टोरों से एंटीबायोटिक, बुखार और सिर एवं बदन दर्द की अनाप-शनाप दवाएं खाकर अपनी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। ओवरडोज और वक्त-बेवक्त दवाएं खाने से सीधे किडनी पर जोर पड़ रहा है। चिकित्सक की बगैर सलाह के दवाएं खाकर खुद को बीमार कर रहे हैं। अनाप-शनाप दवाएं खाने से साइड एफेक्ट हो जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि कोरोनाकाल में वायरल की चपेट में आने वाले अधिकतर लोग खुद ही डाक्टर बनकर अपना इलाज कर रहे हैं और हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार बताते हैं, वायरल पीड़ितों की संख्या बढ़ने लगी है। अधिकतर मरीज डाक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना दवाएं खा रहे हैं। दवा की ओवर डोज से एसिडिटी और पेट में अल्सर का खतरा होता है। डा. राजेंद्र कुमार बताते हैं, दवाएं कोई भी हों उनका दुष्प्रभाव होता है। हर दवा की खुराक बीमारी, मरीज की उम्र और वजन के हिसाब से होती है।
हर दवा की खुराक का है मानक
एंटीबायोटिक दवाएं 15 एमजी प्रति किलोग्राम वजन से दी जाती हैं। सामान्यतौर पर 65 किलोग्राम वजन वाले व्यक्ति के लिए एक हजार एमजी की डोज प्रतिदिन होती है। छोटे बच्चों को एक चम्मच सिरप दी जाती है। दवाएं आठ से 12 घंटे के अंतराल में दी जाती हैं। तीन से पांच दिन का कोर्स होता है। कोर्स पूरा नहीं होने पर दोबारा बैक्टीरिया हमला करता है। इसी तरह पेरासिटामोल नवजात के टीकाकरण से पांच माह तक 60 एमजी सिरप की खुराक होती है। छह माह से दो साल की उम्र तक 120 एमजी दी जाती है। दो से पांच साल की उम्र तक 180 एमजी, छह साल से सात वर्ष की उम्र तक 240 एमजी का मानक है। आठ साल से 11 साल की उम्र तक 360 एमजी, 12 साल से 15 साल के किशोर को 480 एमजी और 16 साल से अधिक उम्र के वयस्क को 500 एमजी दी जाती है। दवा की अधिकम खुराक चार से छह घंटे की होती है। ओवर डोज शरीर को नुकसान पहुंचाती है।
- दर्द निवारक दवाएं लेने से बचें। दर्द निवारक दवाएं सीधे किडनी पर असर करती हैं। बहुत जरूरत होने पर ही चिकित्सक की सलाह पर ले सकते हैं। ओवर ऑल डोज लीवर और किडनी पर असर डालती है। घुटने और कमर दर्द के मरीज सालों से दर्द निवारक दवाएं खाकर किडनी के मरीज बन गए हैं। ऐसे मरीजों को सामान्य व्यक्ति से कम डोज देनी होती है।
- डा. अनुज कुमार, गुर्दा रोग विशेषज्ञ एपेक्स
- एंटीबायोटिक को लेकर लोगों में गलत धारणा है। बुखार, सर्दी और जुकाम के 70 फीसदी मरीज सामान्य दवाओं से ठीक हो जाते हैं। मौसमी बुखार, सर्दी, जुकाम पर एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं पड़ती है। पेरासिटामोल और एंटी एलर्जिक दवाओं से मरीज तीन दिन में ठीक हो जाता है। गलतफहमी के चलते लोग एंटीबायोटिक दवाएं खा रहे हैं।
- डा. प्रवीण शाह, फिजिशियन, जिला अस्पताल
- खाली पेट दर्द निवारक और एंटीबायोटिक घातक होती है। इससे गैस्ट्रिक और एसिडिटी बढ़ जाती है। एल्कोहल के साथ तो दवाएं भूलकर भी नहीं लेनी चाहिए। दवा के साथ अधिकतर लोग दो घूंट पानी पीते हैं। शरीर में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें। पानी पीने से दवाओं का टॉक्सिन शरीर से बाहर आ जाते हैं। इससे दवाओं के दुष्प्रभाव का खतरा कम हो जाता है।
- सपना सिंह, डायटीशियन, जिला अस्पताल
दवाओं के ओवर डोज से नुकसान
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- किडनी पर जोर पड़ने लगता है
- उल्टी, पेट दर्द, डायरिया
- चक्कर आना और पेट में अल्सर की समस्या
- स्किन रैशेज, इचिंग और एलर्जी
- गर्भवती में ब्लीडिंग और गर्भपात होने की संभावना
- सांस लेने में परेशानी
इनके लिए चिकित्सक की सलाह बेहद जरूरी
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- गर्भवती या स्तनपान कराती हैं
- गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं
- नियमित शराब का सेवन करते हैं
- किसी दवा से एलर्जी है
- बच्चों के लिए