मुरादाबाद। मंडल स्तरीय सरकारी अस्पताल का ब्लड बैंक इन दिनों सूख रहा है। इसे रक्तदाताओं की जरूरत है। वर्तमान में सिर्फ 40 से 50 यूनिट रक्त शेष है, जो जरूरत के हिसाब से बेहद कम है।
मुरादाबाद में थैलेसीमिया के 110 रोगी पंजीकृत हैं।
इन्हें हर दूसरे महीने सरकारी ब्लड बैंक से निशुल्क रक्त दिया जाता है। बदले में किसी से रक्तदान कराने की बाध्यता भी नहीं है। इसके अलावा महिला अस्पताल में आने वाली रक्ताल्पता से जूझ रहीं गर्भवती महिलाओं को दुर्घटना में घायल मरीजों को, कैंसर पीड़ितों और डायलिसिस करा रहे रोगियों को यहां से खून दिया जाता है।
इसके कारण ब्लड बैंक को लगातार खून की जरूरत पड़ती है। दिसंबर से मई तक रक्तकोष में यह दिक्कत अक्सर हो जाती है। ऐसे में सरकारी अस्पताल के डॉक्टर समाज सेवी संस्थाओं से रक्तदान की अपील कर रहे हैं।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संगीता गुप्ता ने बताया कि मुरादाबाद में पिछले पांच वर्षों में थैलेसीमिया पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इतने मरीज मंडल के किसी और जिले में नहीं हैं।
इन बच्चों को हर 45 से 60 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनके दो या तीन बच्चे थैलेसीमिया से जूझ रहे हैं। रक्तकोष में इन दिनों ए पॉजिटिव, ए निगेटिव, ओ निगेटिव, एबी निगेटिव और एबी प़ॉजिटिव रक्त की कमी है।
ओ पॉजीटिव और बी पॉजिटिव रक्त की यूनिट पर्याप्त हैं। हालांकि ज्यादातर लोगों को इन दो यूनिट की ही जरूरत होती है, इसलिए यह भी कब खत्म हो जाएं, कहा नहीं जा सकता। कई बार मंडल के अन्य जिलों के सरकारी ब्लड बैंक में लोगों को रक्त नहीं मिलता तो यहां लेने आते हैं।