मुरादाबाद। शहर के बीचों बीच स्थित जिला जेल बंदियों के बोझ से हांफ रही है। क्षमता से दोगुने से ज्यादा बंदी होने के कारण बैरकों में इन्हें ठहराने और सुरक्षित रखना जेल प्रशासन के लिए हमेशा चुनौती बना रहता है। करोड़ों रुपये की 100 एकड़ जमीन खरीदने के आठ साल बाद भी नई जेल का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
तकरीबन 15 साल पहले जिला प्रशासन ने शहर के बीच स्थित जेल को बाहर शिफ्ट करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया था। पुरानी जेल होने के साथ ही हमेशा जेल में क्षमता से ज्यादा बंदी रहते हैं। मंडल के अमरोहा और संभल के बंदी होने के कारण इनकी संख्या और बढ़ जाती है। बंदी को दूसरे जिलों में पेशी पर ले जाने और लाने के दाैरान जेल रोड पर जाम स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा मुलाकातियों के वाहनों के कारण भी जाम लगा रहता है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए ही जेल को शहर से बाहर शिफ्ट करने की कार्य योजना तैयार की गई। करीब आठ साल पहले अफसरों ने मूंढापांडे के सिरसखेड़ा में जमीन तय की और शासन को फाइल भेजी गई। 100 एकड़ जमीन जेल के लिए खरीदी गई। पहले 3000 बंदियों की क्षमता वाली जेल के निर्माण के लिए शासन को डीपीआर भेजी गई जिसमें कुछ आपत्तियां आने के कारण दोबारा डीपीआर भेजी गई।
वर्तमान में पुरानी जेल की क्षमता 906 बंदी रखने की है लेकिन वर्तमान में 1950 बंदी रह रहे हैं। इनमें 70 महिला बंदी हैं। 417 करोड़ का बजट जेल के निर्माण के लिए मांगा गया है। अगर शासन से मंजूरी भी मिल जाती है तो दो से तीन साल का समय तब भी लग जाएगा। तब तक पुरानी जेल में ही क्षमता से अधिक बंदी और कैदी रहेंगे।
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जेल में 906 बंदी रखने की क्षमता है लेकिन वर्तमान में 1950 के आस पास बंदी हैं इनमें 70 महिला हैं। नई जेल के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। पीडब्ल्यूडी के डीपीआर बनाकर शासन को भेज दिया है। बजट जारी होते ही जेल का निर्माण शुरू हो जाएगा। संभल और अमरोहा में भी अलग जेलों का निर्माण किया जाएगा।
आलोक सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जिला कारागार