मुरादाबाद। डीजीएफटी दफ्तर की शिफ्टिंग रुकवाने के लिए निर्यातकों का एक प्रतिनिधि मंडल दिल्ली कूच कर गया है। सरकार मुरादाबाद में स्थित डीजीएफटी (डायरेक्टर जनरल फॉरेन ट्रेड) दफ्तर को दिल्ली डीजीएफटी में मर्ज करने का नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है। मुरादाबाद में पहले डीडीजीएफटी (डिप्टी डायरेक्टर जनरल फॉरेन ट्रेड) का स्थायी पद था। उत्पल आचार्य के कोलकाता तबादले के बाद यहां दिल्ली में तैनात डीडीजीएफटी को अतिरिक्त प्रभार के तौर पर तैनाती दी गई थी। वह सप्ताह में एक दिन मुरादाबाद बैठते थे। लेकिन 16 सितंबर से डीजीएफटी का पूरा स्टॉफ और दफ्तर दिल्ली दफ्तर में मर्ज हो जाएगा।
निर्यातकों को अपना कारोबार चलाने के लिए कदम - कदम पर डीजीएफटी दफ्तर से संपर्क करना पड़ता है। एमईआईएस लाइसेंस, एडवांस लाइसेंस, ईपीसीजी और एक्सपोर्ट लाइसेंस से संबंधित सभी काम डीजीएफटी दफ्तर से ही होते हैं। ईपीसीएच के सीओए मेंबर अनूप शांखधार का कहना है कि डीजीएफटी दफ्तर के मुरादाबाद से चले जाने के बाद निर्यातकों को कदम - कदम पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। पहले से ही हस्तशिल्प उद्योग मंदी की मार झेल रहा है। ऐसे में हर छोटे - बड़े काम के लिए यदि निर्यातकों को दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ेगी तो समय और पैसे दोनों की बर्बादी होगी। उन्होंने कहा कि वह साथी निर्यातकों के साथ दिल्ली जा रहे हैं और ईपीसीएच के नेतृत्व में मामले को मंत्रालय में उठाएंगे।
ईपीसीएच के पूर्व चेयरमैन सतपाल का कहना है कि उन्होंने इस मामले में रविवार को कॉमर्स सेक्रेटरी अनूप वधावन से बात की है। उन्हें बताया गया है कि यदि डीजीएफटी दफ्तर को शिफ्ट किया गया तो इसका निर्यात पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने विचार करने का आश्वासन दिया है। सतपाल का कहना है कि पानीपत दिल्ली से महज 40 किमी दूर है लेकिन वहां डीडीजीएफटी को बरकरार रखा गया है जबकि मुरादाबाद दिल्ली से 150 किमी से भी अधिक दूर होने के बावजूद दफ्तर खत्म कर दिया गया। डीजीएफटी और कॉमर्स सेक्रेटरी को भेजे मेल में उन्होंने तर्क दिया है कि मुरादाबाद से होने वाला निर्यात पानीपत की तुलना में कहीं ज्यादा है। इसलिए दफ्तर को खत्म नहीं किया जाए।
16 सितंबर के बाद से निर्यातकों के सभी आवेदन दिल्ली दफ्तर में होंगे। यहां कार्य बंद हो जाएगा। लेकिन रिकार्ड को शिफ्ट करने के लिए स्टाफ अभी एक महीना और यहां रहेगा। - तेजवीर सिंह, विदेश व्यापार अधिकारी।