मुरादाबाद। महाशिवरात्रि पर कांवड़ चढ़ाने के लिए गंगाजल लेकर कांवड़ियों के वापस लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। सोमवार को रामपुर, बरेली, बदायूं और संभल के कांवड़ियों के लौटने की वजह से कांठ रोड पर रौनक रही। वहीं शहर के मंदिरों में भी साफ-सफाई कराई गई।
गंगाजल से भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है। शिवरात्रि मेले और जलाभिषेक की तैयारियां मंदिरों में पूरी कर ली गई हैं। शहर के तीन प्रमुख मंदिरों में कांवड़ियों की अच्छी खासी भीड़ रहती है। चौरासी घंटा मंदिर, झारखंडी महादेव मंदिर और महाकालेश्वर धाम मंदिर में जलाभिषेक के लिए सोमवार को साफ-सफाई के कार्य को अंतिम रूप दिया गया।
झारंखडी महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी भोलेनाथ योगीराज ने कहा कि आठ सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा मंगलवार को सजावट भी पूरी हो जाएगी। चौरासी घंटा मंदिर के मुख्य पुजारी विष्णुदत्त शास्त्री ने बताया कि मंगलवार दोपहर तक फूलों की सजावट होगी। श्रद्धालुओं के आने और जाने की व्यवस्था अलग-अलग द्वार से की गई है।
वहीं साेमवार को कांठ रोड पर सुबह से ही कांवड़ियों के जत्थों की संख्या बढ़ गई थी। दोपहर तक बड़ी संख्या में कांवड़िये आने लगे थे। कदम-कदम पर भगवान शिव के जयकारे गूंज रहे थे। कंधे पर कांवड़ और पैरों में घुंघरू पहनकर ओम नम: शिवाय का जाप करते हुए श्रद्धालु अपने गंतव्य को जा रहे थे। कांवड़ियों की सेवा के लिए कांठ रोड पर जगह-जगह शिविर भी लगाए गए, जहां उनके जलपान, आराम के अलावा प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई है।
शिविरों में भी भोलेनाथ के भजन बज रहे हैं। रामपुर के सदर तहसील के ब्रजेश सैनी, राहुल पाल ने बताया कि उनके साथ 20 श्रद्धालु हैं। वह मंगलवार सुबह तक अपने यहां पहुंच जाएंगे। दिनभर मंदिर परिसर में आराम करेंगे और फिर बुधवार तड़के गंगाजल से भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे। बरेली के फरीदपुर निवासी बबलू प्रधान ने बताया कि उन्होंने हरिद्वार से 22 फरवरी को कांवड़ उठाई थी। यह उनकी तीसरी कांवड़ है। उनके साथ 25 अन्य श्रद्धालुओं का जत्था है। वह परिजनों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए भोलेनाथ का जलाभिषेक करना चाहते हैं।
हरिद्वार से गंगाजल लाए दंपती
बिलारी के मंगुपूरा निवासी जगदीश महाशिवरात्रि पर हर बार हरिद्वार से कांवड़ लेकर आते हैं। इस बार वह अपनी पत्नी अंशु के साथ कांवड़ लाए हैं। अंशु ने कहा कि हमारी जोड़ी मां पार्वती और भोलेनाथ जैसी है। जब मेरे पति ने कहा कि इस बार तुम मेरे साथ कांवड़ लाने चलोगी तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैं सौभाग्यशाली हूं, जो पति के साथ कांवड़ लाने का मौका मिला।