जलियांवाला बाग एक्सप्रेस के तीन कोच पटरी से उतर चुके थे लेकिन ड्राइवर को इस बात का अहसास तक नहीं हुआ। पटरी से उतरे डिब्बों को ट्रेन घसीटे ले जा रही थी। ऐसे में इन डिब्बों में सवार यात्रियों को मौत साफ नजर आने लगी। यात्रियों का कहना था उन्होंने तीनों कोच में एक साथ चेन पुलिंग की तब जाकर ट्रेन रुकी।
गनीमत रही कि ट्रेन की रफ्तार कम थी और एक डिब्बे को छोड़ बाकी डिब्बे पुल को पार कर चुके थे, डिब्बे पुल के ऊपर पटरी से उतरते तो बड़ा हादसा भी हो सकता था। एसी थ्री टीयर बी वन कोच में सवार यात्रियों का कहना है कि एसी बी वन और एस- 10 व एस 11 एक - एक अचानक तेज झटके के साथ पटरी से उतरे।
पहले तो यात्रियों ने समझा कि ट्रेन पुल को क्रास कर रही है इसलिए ये झटके महसूस हुए हैं। लेकिन जब ट्रेन के ये तीनों तिरछा होकर डिब्बे दौड़ने के बजाए घिसटने लगे और तेज आवाज होने लगी तो यात्रियों में दहशत फैल गई। यात्रियों को समझते देर नहीं लगी कि ट्रेन पटरी से उतर चुकी है।
तीनों कोच के यात्रियों ने चेन पुलिंग की। लेकिन रुकते रुकते पटरी से उतरे डिब्बे काफी दूर तक घिसट चुके थे। जिसकी वजह से पटरी से चिंगारियां उठने लगीं और डाउन लाइन का ट्रैक भी क्षतिग्रस्त हो गया। पटरी से उतरे डिब्बों ने सिंग्नल पोल को भी तोड़ डाला।
ट्रेन रुकने के काफी देर बाद भी यात्रियों के चेहरों पर खौफ तैरता रहा। उधर, हादसे के बाद ठप हुए मुरादाबाद - लखनऊ रेल ट्रैक को सुचारू करने के लिए रात में ही डाउन ट्रैक की मरम्मत के लिए रेलवे के इंजीनियरों की टीम मौके पर पहुंच गई थी।