मुरादाबाद। कानपुर में रविवार को आयोजित राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री योगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान और दर्शन से बच्चों को परिचित कराना शिक्षकों का प्रमुख दायित्व है। नई शिक्षा नीति का समूचा ढांचा, भारतीय जीवन एवं संस्कारों के परिप्रेक्ष्य में तैयार किया गया है। इन नीति को सफल बनाने की जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है।
उन्होंने टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने, शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की धारा 21 बहाल करने, स्व वित्त पोषित विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली बनाने की मांग की है। आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अरविंद दीक्षित ने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश का एक मात्र ऐसा संगठन है जो शिक्षक समस्याओं के समाधान के साथ-साथ शैक्षिक उन्नयन एवं राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का सराहनीय कार्य कर रहा है। इस मौके पर प्राथमिक संवर्ग के महामंत्री प्रदीप तिवारी, माध्यमिक संवर्ग के महामंत्री संतोष शुक्ला, प्रदेश कोषाध्यक्ष नीलमणि शुक्ला, रचना अवस्थी, संजय अवस्थी आदि मौजूद रहे।