-27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को सांसद रुचि वीरा से मुलाकात की। उन्होंने टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने की मांग उठाई। महासंघ ने इसके लिए आरटीई (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम में आवश्यक संशोधन कराने की मांग करते हुए सांसद को ज्ञापन सौंपा।
महासंघ के मंडल एवं जिलाध्यक्ष शांति भूषण वर्मा ने कहा कि शिक्षक भर्ती के लिए बाद में निर्धारित पात्रता मानकों को पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत है। जिला महामंत्री अकरम हुसैन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के बाद उन शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है, जिनकी नियुक्ति टीईटी लागू होने से पहले तत्कालीन नियमों और निर्धारित योग्यताओं के आधार पर हुई थी। ऐसे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
जिला संयुक्त महामंत्री राजकुमार शर्मा ने बताया कि यह अभियान देशभर में चलाया जा रहा है। विभिन्न जिलों में सांसदों को ज्ञापन देकर केंद्र सरकार से 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकार, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य वैधानिक लाभ सुरक्षित रखने के लिए संसद के आगामी मानसून सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन कराने की मांग की जा रही है। पदाधिकारियों का कहना है कि सांसद रुचि वीरा ने आश्वस्त किया कि वह इस विषय को संसद के आगामी मानसून सत्र में अपने स्तर से उठाने का प्रयास करेंगी।