मुरादाबाद। जिला अस्पताल में एमआरआई जांच शुरू करने की कवायद अब जमीन पर दिखाई देने लगी है। मंगलवार को दिल्ली से पहुंची तकनीकी टीम ने अस्पताल परिसर में बने एमआरआई केंद्र का निरीक्षण किया। टीम ने मशीन स्थापित करने के लिए भवन और वहां उपलब्ध तकनीकी व्यवस्थाओं को देखा। भवन में किसी तरह के बदलाव या रेनोवेशन की जरूरत नहीं बताई, सब कुछ ठीक पाया गया है। अक्तूबर से जांच शुरू होने की उम्मीद है।
जिला अस्पताल में एमआरआई केंद्र का भवन करीब पांच साल से तैयार है, लेकिन मशीन स्थापित नहीं हो सकी। वर्ष 2021 में करीब 97 लाख रुपये की लागत से एमआरआई भवन का निर्माण कराया गया था। भवन तैयार होने के बाद भी मशीन नहीं आने से मरीजों को एमआरआई जांच के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। निजी केंद्रों पर जांच कराने में मरीजों को करीब आठ से दस हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
अब शासन स्तर से मुरादाबाद समेत मंडल स्तरीय 18 सरकारी अस्पतालों में एमआरआई सुविधा शुरू कराने की कार्रवाई की जा रही है, जहां इसके लिए भवन तैयार हैं। मंगलवार को आई दिल्ली की तकनीकी टीम इसी प्रक्रिया के तहत अस्पताल पहुंची। जांच सुविधा पीपीपी मॉडल पर शुरू किए जाने की संभावना है। चिकित्साधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल में रोजाना औसतन 1800 से 2000 मरीजों की ओपीडी होती है। करीब 12 मरीज प्रतिदिन ऐसे होते हैं, जिन्हें एमआरआई जांच की जरूरत पड़ती है। अभी इन मरीजों को निजी केंद्रों का रुख करना पड़ता है। एमआरआई मशीन लगने के बाद न्यूरो, हड्डी और गंभीर चोटों से जुड़े मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों पर निर्भरता कम होगी।