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५२६० लोगों के घर नहीं पहुंची उनकी मौत की चिट्ठी न कोई संदेश

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मुरादाबाद (अभिषेक सिंह)। अपने घरों से मीलों दूर इन लोगों ने दम तोड़ा तो पुलिस रिकार्ड में महज लावारिस बनकर रह गए। इनमें से किसी को हत्या करके यहां फेंका गया था तो कोई बीमारी की वजह से मर गया। कई ऐसे भी थे जो दुर्घटना में मरे पर पुलिस उनका पता ठिकाना नहीं खोज सकी। पुलिस की कवायद लावारिस के तौर एनजीओ से इनका क्रिया कर्म कराने से आगे नहीं बढ़ी। पुलिस विभाग के आंकडे़ खाकी की लापरवाही और नाकामी की कलई खोल रहे हैं। पिछले 18 सालों में जिले के भीतर 5300 लावारिस शव मिले। लेकिन पुलिस इनमें से सिर्फ 40 शवों की ही शिनाख्त करा सकी। जिले की सीमा में मिले 5260 शव किसके थे, मरने वाले कहां के रहने वाले थे और यहां कैसे पहुंचे.. ऐसे तमाम सवाल अनुत्तरित हैं। पुलिस इनकी शिनाख्त नहीं करा सकी। बल्कि यूं कहें कि जिले में मरे 5260 लोगों की मौत की खबर तक उनके घर वालों को नहीं पहुंच पाई। वो शायद आज भी इनके जिंदा होने की आस में दरवाजों पर नजरें गढ़ाए होंगे।
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आंकड़े बताते हैं कि लावारिस शवों की शिनाख्त कराने में पुलिस ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। लोग मरते रहे और लावारिस का आंकड़ा बढ़ता गया। लावारिस मरे लोगों में से ज्यादातर को भिखारी बताकर पुलिस ने पल्ला झाड़ लिया। एनजीओ की मदद से इन शवों का अंतिम संस्कार कराया और फाइलें बंद कर दी गईं। ये लाशें सिर्फ जीडी के तस्करों तक सिमटकर रह गईं। कोई क्राइम नंबर इन्हें नसीब होता तो शायद पुलिस इनकी तलाश की कोशिश भी करती।
जिले में पुलिस लावारिस शवों को अंतिम संस्कार के लिए ह्यमुन वेलफेयर एसोसिएशन को सौंपती है। एसोसिएशन के पदाधिकारी राशिद मियां ने बताया कि पिछले 18 सालों से वह करीब 5300 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं। जिनमें से 3000 से अधिक शव हिंदू समुदाय के लोगों के थे जबकि करीब 2000 शव मुस्लिम समुदाय के लोगों के थे। मरने वाले धर्म के मुताबिक उसका अंतिम संस्कार किया जाता है। राशिद मियां ने बताया कि हिंदू समुदाय के लोगाें के शवों का अंतिम संस्कार लालबाग स्थित शमशान घाट में किया गया है जबकि मुस्लिम समुदाय के लोगों के शवों को झब्बू के नाले के पास स्थित कब्रिस्तान में दफन किया गया है। लावारिस मिले हिंदू शवों की अस्थियों को करीब एक साल तक संस्था ने अपने पास रखा लेकिन जब कोई पहचान नहीं हुई तो अस्थियां ब्रजघाट में प्रवाहित करा दी गईं।
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‘ लावारिस शवों की शिनाख्त के लिए पुलिस द्वारा हरसंभव प्रयास किए जाते हैं। कई मामलों में पुलिस को शवों की शिनाख्त में कामयाबी मिली है तो कई मामले ऐसे हैं, जिनमें शिनाख्त नहीं हो सकी है।
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अमित पाठक, एसएसपी
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