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अंधेरगर्दी: माह बाद भी शुरू नहीं हो सका मंडी का काम

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मुरादाबाद। शासन से 5.45 करोड़ की धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद कृषि उत्पादन मंडी समिति मझोला में विकास कार्य शुरू नहीं हो सका है। छह महीने पहले बजट पास होने के बाद भी अबतक जमीन पर एक भी प्रतिशत काम नहीं हुआ। मंडी प्रशासन की कार्यशैली और व्यापारियों के विरोध के चलते यह विकास कार्य फाइलों में ही अटका हुआ है।
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मझोला मंडी के लिए यह धनराशि अगस्त-2025 में स्वीकृत हुई थी। इस बजट से सब्जी और फल मंडी परिसर में 38 नई दुकानों के निर्माण, छायादार नीलामी चबूतरा, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग और ड्रेनेज जैसे कार्य कराए जाने हैं। शासन से बजट आवंटित होने के बाद भी मंडी परिसर में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। दुकानों के निर्माण के लिए चिन्हित स्थानों को खाली कराने को लेकर मंडी प्रशासन और व्यापारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। मंडी प्रशासन ने दो बार व्यापारियों को जगह खाली करने के नोटिस जारी किए लेकिन इसका विरोध हुआ। व्यापारी वैकल्पिक व्यवस्था कराने की मांग पर अड़े रहे।
मंडी प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए फाउंडेशन का काम शुरू कराने की कोशिश की तो व्यापारियों के दबाव में प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े। व्यापारी बिना वैकल्पिक व्यवस्था हुए अपनी जगह खाली करने के लिए तैयार नहीं हैं। व्यापारियों का यह भी तर्क है कि मौजूदा योजना से मंडी की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। 40 साल पुरानी मंडी में 258 दुकानें हैं जबकि लाइसेंस 550 आढ़तियों का है। मंडी परिसर में कई स्तर पर अव्यवस्थाएं भी फैली हुई हैं जिनका समाधान नहीं किया जा रहा है।
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मालूम हो कि मंडी समिति में सुधार के लिए पहले भी कई बार प्रस्ताव भेजे गए थे लेकिन अधिकतर प्रस्तावों को शासन स्तर से मंजूरी ही नहीं मिल पाई थी। लंबे समय के बाद अब शासन से बजट आवंटित हुआ है तो यह धनराशि फाइलों और विवादों की भेंट चढ़ रही है।

वर्जन
- मंडी में जो भी प्रस्तावित कार्य कराए जाने हैं उसे कराया जाएगा। व्यापारियों के साथ लगातार बातचीत चल रही है। जल्द ही सहमति बनने के आसार हैं। - विनय पांडेय, सिटी मजिस्ट्रेट एवं मंडी सभापति
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