अगवानपुर। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी और डॉक्टरों की दवाएं गोवंश की जान बचाने में नाकाम साबित हो रही हैं। अगवानपुर की गोशालाओं में दो सालों में 51 गोवंशीय पशुओं की जान चली गई। इनमें डेढ़ साल से सात वर्ष या इससे अधिक आयु के पशु शामिल है।
गोशालाओं से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक अगवानपुर की कान्हा गोशाला में 27 और भटावली में 24 गोवंशीय पशु दम तोड़ चुके है।औसतन 15 दिन में एक पशु जान गंवा रहा है। कोई बीमारी तो कहीं हरा चारा नहीं मिलने से पशुओं की जान जा रही है। जिम्मेदार लोग और अधिकारी गोशाला में बंदोबस्त ठीक-ठाक होने का दावा करके शासन तक अपनी पीठ थपथपा रहे हैं लेकिन अव्यवस्थाओं के बीच पशुओं की मौत सेवादारों की सेवा पर सवाल है। भले ही गोशाला में पशुओं के इलाज के लिए लगी डॉक्टर हो, गोवंश के लिए आश्रय बनाकर उन्हें ठहराने के स्थान पर खानपान की व्यवस्था हो, यह सब बैठकों में चर्चा का विषय तो रहते हैं लेकिन वास्तविकता इससे उलट है।
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10 गांवों पर चारे की जिम्मेदारी
भटावली की गोशाला में आंकड़ों के अनुसार 140 गोवंश है। जिनका चारे और देखभाल का खर्चा 10 ग्राम पंचायतें उठाती हैं लेकिन कुछ महीने से ग्राम प्रधानों ने चारा नहीं दिया। जिससे गोवंश बीमार हो गए। इनमें से दो गोवंश की मौत भी हो चुकी है लेकिन अधिकारियों के कड़े रुख के बाद ग्राम प्रधान सक्रिय हुए और गोशाला में चारा भेज दिया गया।
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कान्हा गोशाला में 170 गोवंश
अगवानपुर की कान्हा गोशाला में 170 गोवंश है।जबकि दो साल में 27 की मौत हो चुकी है और 40 के करीब किसानों को मुख्यमंत्री सहभागिता के तहत दान में दिए जा चुके हैं। पशुओं के खाने का इंतजाम नगर पंचायत की तरफ से किया जाता है।जबकि बीमार पशु की देखरेख के लिए डॉक्टर तैनात है। वहीं, भटावली की गोशाला में करीब 140 गोवंश है। इन 140 के कानों में पहचान का टोकन लगा है लेकिन गोशाला में कई गोवंश ऐसे भी देखे गए जिनके कान में पहचान का चिन्ह नहीं था।
वर्जन
गोशाला में एक्सीडेंटल और बीमार दोनों ही तरह के पशु आते हैं चिकित्साधिकारी, तुरंत ऐसे पशुओं को इलाज करते हैं। गोशाला बनने से अब तक ऐसे 24 गोवंश की मृत्यु हो चुकी है। हालिया समय में गोशाला में 140 गोवंश है। वहीं कई पशु बीमार है, जिनका इलाज तत्परता से किया जा रहा है।
डॉ सोएब, चिकित्सा अधिकारी, भटावली गोशाला
वर्जन
- अगवानपुर गोशाला जब से बनी है अब तक 27 गोवंश की मौत हो चुकी है, जबकि 40 के करीब किसानों को सुपुर्द दिए गए हैं। दिसंबर में एक और जनवरी महीने में दो मौतें हुई है। गोशाला में हरा चारा, चौकर, दाना,भूसा और गुड़ का इंतजाम है, जोकि डॉक्टर की सलाह के मुताबिक दिया जाता है।
नीतू सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, अगवानपुर
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अपर निदेशक ने किया गोशाला का निरीक्षण
अगवानपूर।
भटावली की अस्थाई गोशाला में दो गोवंशीय पशुओं की मौत से प्रशासन में खलबली है, शनिवार को अपर निदेशक डॉ जगदीश प्रसाद ने गोशाला का निरीक्षक किया। खुले आसमान में कड़ाके की ठंड से तड़प रहे गोवंश को टीन शेड के नीचे डलवाया। उन्होंने अपने सामने बीमार गोवंश का इलाज कराया। गोवंश को बेहतर दवाई के साथ हरे चारे का प्रबंध कराया।
भटावली की अस्थाई गोशाला में शुक्रवार को कड़ाके की ठंड में दो गोवंश ने दम तोड़ दिया था। गोवंश की मौत से आक्रोशित राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने डीएम दफ्तर कर प्रदर्शन किया था। शनिवार को मंडलीय चिकित्सा अधिकारी डॉ.जगदीश प्रसाद ने गोशाला का निरीक्षक किया। अपर निदेशक के साथ में गोशाला के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर शोएब भी मौजूद रहे। डॉक्टर शोएब ने बीमार पशुओं का चेकअप किया। खुले आसमान में बीमार गोवंश को एक तिरपाल से ढका देकर अपर निदेशक नाराज हुए। उन्होंने तभी उन पशुओं को वहां से उठवाया और टीन शेड के नीचे डालने को कहा। कर्मचारियों ने ऐसे जानवरों को टीन शेड में डाल दिया। सफाई कर्मियों ने गोवंश के नीचे से गीला कूड़ा निकालकर साफ सफाई की। अपर निदेशक डॉ जगदीश प्रसाद ने बताया कि बीमार पशुओं की देखरेख की जा रहीं है। इलाज के साथ हरा चारे और अन्य खानपान की व्यवस्था की दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।