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Moradabad News: मरीजों की भीड़, वार्ड फुल... एक बेड पर दो का इलाज

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मुरादाबाद। भीषण गर्मी और मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के बीच जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं मरीजों के बढ़ते दबाव के आगे कम पड़ती नजर आ रही हैं। अस्पताल में बेडों की उपलब्धता सीमित होने के कारण कई वार्डों में एक ही बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मंगलवार को बच्चा वार्ड और फीवर वार्ड की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक रही।
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जिला अस्पताल में 250 से अधिक बेड उपलब्ध हैं। लेकिन भर्ती मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण वार्ड लगभग फुल चल रहे हैं। मंगलवार को बच्चा वार्ड में 40 बच्चे भर्ती मिले। इनमें 25 से अधिक बच्चे बुखार और डायरिया से पीड़ित हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कई बेडों पर दो-दो बच्चों को भर्ती कर इलाज देना पड़ा। फीवर वार्ड में भी इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब दो हजार मरीज पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक भीड़ मेडिसिन, बाल रोग और टीबी-चेस्ट विभाग में देखने को मिल रही है। डॉक्टरों के अनुसार भर्ती होने वाले मरीजों में बड़ी संख्या बुखार, उल्टी और दस्त से पीड़ित लोगों की है। रोजाना भर्ती मरीजों का आंकड़ा भी 140 के पार पहुंच रहा है, जिससे वार्डों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
ओपीडी और इमरजेंसी में मरीजों की संख्या बढ़ने का असर पैथोलॉजी विभाग पर भी दिखाई दे रहा है। सोमवार और मंगलवार को लगभग 300-300 मरीज जांच कराने पहुंचे। इसके चलते अस्पताल में होने वाली विभिन्न जांचों की संख्या 1500 के पार पहुंच गई। जांच रिपोर्ट तैयार करने और सैंपल संग्रहण के लिए भी अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
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पहले निजी अस्पताल में डलवाओ लाइन फिर सरकारी में होगी डायलिसिस
जिला अस्पताल में वर्षों से डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद अब तक नेफ्रोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। किडनी रोगियों को पहले निजी अस्पताल जाकर विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाना पड़ता है। इसके बाद वहीं डायलिसिस के लिए लाइन डलवानी पड़ती है, तब जाकर जिला अस्पताल में डायलिसिस की प्रक्रिया पूरी हो पाती है। मरीजों के परिजनों के अनुसार निजी अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट की फीस करीब एक हजार रुपये देनी पड़ती है। इसके अलावा लगभग 1800 रुपये की डायलिसिस लाइन खरीदनी होती है और उसे लगवाने का अलग शुल्क भी देना पड़ता है। इन औपचारिकताओं के बाद ही मरीज जिला अस्पताल में डायलिसिस सुविधा का लाभ ले पाते हैं।


वर्जन
किसी भी मरीज को भर्ती करने से मना नहीं किया जाता है। बढ़ते भार को देखते हुए अतिरिक्त बेड, बजट आवंटन और एक नए ऑपरेशन थिएटर के लिए प्रस्ताव भेजा है। मौसमी बीमारी के मरीज ज्यादा हैं। धीरे-धीरे समस्या कम हो जाएगी।
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- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, एसआईसी
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