पीतल नगरी की हवा रविवार को गंभीर स्थिति में पहुंच गई। चार सौ पार पहुंचे वायु गुणवत्ता सूचकांक से वातावरण में भारी कणों के साथ अब गैसों में बढ़ोतरी होने लगी है। शहर की अवैध पीतल भट्ठियां शहरवासियों की सांसों पर संकट बन रही हैं। लोगों को सांस से संबंधित तमाम तरह की बीमारियां हो रही हैं। दीपावली पर जलने वाले पटाखे उनकी इस परेशानी में बढ़ोतरी कर देंगे।
आमजनों का कहना है दीपावली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण से अभी से डर लग रहा है। वहीं, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि दीपावली के बाद पीतल भट्ठियों को गैस में परिवर्तित करने का प्रयास किया जाएगा। मुरादाबाद में रविवार सुबह आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 410 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था। इसमें पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर पांच सौ, न्यूनतम 230 और औसत 410 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था। पीएम 10 का अधिकतम स्तर 467, न्यूनतम 159 और औसत 361 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
वहीं, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का अधिकतम स्तर 134, न्यूनतम 31 और औसत 71 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार चार सौ से ऊपर वायु गुणवत्ता सूचकांक की स्थिति गंभीर श्रेणी में आती है। यह स्वस्थ लोगों को प्रभावित करता है और मौजूदा बीामरियों वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
पीतल भट्ठियों से बढ़ रहा गैसों का स्तर
मुरादाबाद के वायु प्रदूषण पर शोध कर रहे अतुल कुमार चौहान का कहना है कि पीतल भट्ठियों में नाइट्रिक एसिड का इस्तेमाल किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का प्लास्टिक गलाने के लिए नाइट्रिक एसिड का प्रयोग किया जाता है। इससे नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है। मुरादाबाद में वायु प्रदूषण में गैसों के बढ़ने का स्रोत अवैध पीतल भट्ठियां और ई-कचरा जलना प्रमुख कारण है। इससे व्यक्तियों की आंखों और त्वचा में संक्रमण की समस्या होती है।
आंखों में जलन महसूस इसी की वजह से हो रही है। पटाखों जलते समय में अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं। इनमें अलग-अलग धातुएं जिंक, कैडमियम, निकिल, कॉपर, एल्युमिनियम, मैग्नीज को शामिल किया जाता है। पटाखे जलने से इन वातावरण में इन धातु कणों की मात्रा बढ़ जाती है। इससे लोगों को फेफड़ों का कैंसर, क्षय रोग, हृदय रोग आदि बीमारियां होने की आशंका रहती है। यह बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति और नवजात के लिए घातक है।
रात में धधकती हैं भट्ठियां
शहर के लालबाग, नवाबपुरा, नागफनी, बंगला गांव आदि स्थानों पर पीतल की भट्ठियां संचालित की जा रहीं हैं। जिला प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए भट्ठी संचालक दिन में काम करने के बजाय रात में काम करते हैं। इसकी वजह से सुबह पांच बजे से नौ बजे तक का प्रदूषण का स्तर अधिक होता है।
24 घंटे में वायु गुणवत्ता सूचकांक का मानक
एक्यूआई (स्तर) रंग पीएम 10 पीएम 2.5 नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड
अच्छी हरा शून्य-50 शून्य-30 शून्य-40
संतोषजनक हल्का हरा 51-100 31-60 41-80
मध्यम प्रदूषित पीला 101-250 61-90 81-80
खराब नारंगी 251-350 91-120 181-280
बहुत खराब लाल 351-430 121-250 281-400
गंभीर मैरून 430 से अधिक 250 से अधिक 400 से अधिक
गत एक सप्ताह का वायु प्रदूषण
तारीख एवं वायु गुणवत्ता सूचकांक
दो नवंबर 401
तीन नवंबर 410
चार नवंबर 449
पांच नवंबर 490
छह नवंबर 457
सात नवंबर 399
आठ नवंबर 410
मुरादाबाद में करीब पांच से छह हजार पीतल भट्ठियां हैं। लगातार भट्ठियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। गत दो महीने में 25 भट्ठियों को बंद कराया गया है। यह कोयले की भट्ठियां हैं। सभी स्थानों पर गैस की आपूर्ति हुई नहीं है। प्रशासन द्वारा दीपावली के बाद इनको गैस में परिवर्तित करने का कार्य किया जाएगा।
-विकास मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड