द्वारवार की रस्म के लिए दुल्हन मेघना के घर वाले होटल के दरवाजे पर खड़े थे। दूल्हे के दोस्त नशे में धुत होकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे थे। दुल्हन के पिता राजीव को बारातियों की फिक्र थी। नशे में झूमते दूल्हे के दोस्तों को वो बार - बार समझा रहे थे.. गोलियां मत चलाओ.. किसी को लग जाएगी।
लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि दूल्हे के दोस्तों की गोली उन्हीं के इकलौते बेटे की जान ले लेगी। घटना के चश्मदीद ऋषभ के ताऊ शिरीष गुप्ता उस मनहूस घड़ी को रह - रहकर कोस रहे हैं। शिरीष बताते हैं कि द्वारवार के लिए ऋषभ अपने बहनोई पुलक को उतारने बग्घी पर चढ़ा था।
बारात के स्वागत के लिए परिवार के अन्य सदस्य भी पंडाल के गेट के पास ही खड़े थे। इसी दौरान दूल्हे के मैनेजर कमल और उसके अन्य साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना से वहां मौजूद लोग कांप उठे थे। ठीक उसी वक्त मेघना के पिता राजीव गुप्ता दौड़ते हुए पहुंचे थे।
उन्हाेंने कमल और उसके साथियों को समझाया था कि वह फायरिंग न करें, किसी को गोली लग सकती है। उनके समझाने पर कुछ देर के लिए फायरिंग रुकी लेकिन कमल ने फिर गोली चलानी शुरू कर दी।.. और तभी एक गोली ऋषभ के सीने में जा धंसी।
राजीव को भला क्या पता था कि वो दूसरी की जिंदगी की फिक्र करते रह जाएंगे और दूल्हे के दोस्ताें की रंगबाजी उनके अपने इकलौते बेटे की जान ले लेगी। हादसे की जानकारी जैसे ही पंडाल में पहुंची तो वहां मौजूद दुल्हन पक्ष के तमाम लोग मौके पर आ गए।
लेकिन तब तक कमल फरार हो चुका था। कमल दूल्हे का मैनेजर होने के साथ ही उसका काफी करीबी भी है, पिछले कई दिन से वह परिवार के साथ ही था।