यूपी एसटीएफ और पुलिस ने वक्त रहने शार्प शूटरों के कुख्यात गैंग को दबोचकर हत्या की तीन बड़ी वारदातों को टाल दिया है। इन हत्याओं की स्क्रिप्ट सरवर मसरूर और सुभहान के बीच की आपसी गैंगवार के चलते इलाहाबाद की नैनी जेल में लिखी गई थी।
लेकिन नैनी जेल टावर को फिल्टर कर रही एसटीएफ को सर्विलांस के जरिए वक्त रहते इसकी भनक लग गई और शूटरों को उनका टास्क पूरा करने से पहले ही दबोच लिया गया। प्रिंस रोड निवासी सरवर व उसके भाई मसरूर और मुगलपुरा में लाल बाग निवासी मुल्ला सुभहान के बीच की रंजिश करीब डेढ़ी दशक पुरानी है।
सरवर और मसरूर ने वर्ष 2002 में सुभहान के भाई जीशान के साथ मारपीट कर दी थी। इसके बदलने में कुछ दिन बाद ही सुभहान ने सरवर मसरूर के भाई ताज की हत्या कर दी थी। हत्या के इसी मामले में मुल्ला सुभहान को उम्रकैद की सजा हुई थी और पिछले 12 साल से वह जेल में बंद है। सजा होने के बाद उसे नैनी जेल इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया गया था। दस साल से ज्यादा वक्त से सुभहान नैनी जेल में ही है।
ताज मर्डर केस के अलावा उसके ऊपर हत्या के और भी तमाम मामले हैं। इसी घटना के बाद से सरवर मसरूर और मुल्ला सुभहान की अदावत चली आ रही है। सरवर और मसरूर भी कुख्यात रहे हैं, पीतल बस्ती के ब्रास कारोबारी भटनागर हत्याकांड में भी इनका नाम सीबीसीआईडी ने खोला था। हालांकि मौजूदा वक्त में ये दोनों अपने काम धंधे में लगे हैं लेकिन पुलिस के मुताबिक दोनों कुख्यात अपराधी हैं। पुलिस के मुताबिक एक गैंग को सरवर मसरूर लीड करते हैं तो दूसरे को मुल्ला सुभहान लीड करता है।
एसटीएफ एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि इसी रंजिश में नैनी जेल में बंद मुगलपुरा के मुल्ला सुभहान ने अपने शार्प शूटरों अमरोहा के बब्लू खान, इलाहाबाद के अकील उर्फ आशु, मुजफ्फर नगर के कुख्यात शूटर इमरान उर्फ तोता उर्फ चच्चू को अपने दुश्मन सरवर और उसके भाई मसरूर निवासी प्रिंस रोड हाफिज बन्ने की पुलिया और रजा पुत्र छिद्दा खान निवासी अखबार फैक्ट्री थाना कटघर की हत्या की सुपारी दी थी। मुल्ला सुभहान का भतीजा लाल बाग का रिजवान इन शूटरों को गाइड कर रहा था। लेकिन एसटीएफ ने वक्त रहते बब्लू खान और अकील उर्फ आशू को रामपुर से पुलिस ने इमरान तोता और रिजवान को मुजफ्फर नगर से धर दबोचा। शूटरों के कब्जे से अत्याधुनिक असलहे मिले हैं।