चिट फंड कंपनी में हुए करोड़ों के घोटाले के पीछे एक भाजपा नेता का नाम सामने आ रहा है। पुलिस ने इस केस में बुजुर्ग दंपति को तो गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेकिन गेम के असली मास्टर माइंड पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा रही है। भाजपा नेता ने पर्दे के पीछे से पूरा खेल किया और खुद आसानी से बच निकला।
छह माह पहले दंपति के एक बेटे की मौत हुई थी। तब भी इसी भाजपा नेता पर हत्या कराने के आरोप लगे थे। मामला उछला तो काफी था। लेकिन पुलिस ने जांच शुरू करने से पहले ही बंद कर दी थी।
नागफनी थानाक्षेत्र के मोहल्ला चौरासी घंटा निवासी सुषमा देवी पत्नी लक्ष्मीशंकर अग्रवाल और उनके बेटे मोहित अग्रवाल ने वर्ष 2011 में रैंप कैपिटल कंसलटेंसी इंडिया लिमिटेड, रैंप कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड और रैंप म्यूचुअल बेनिफिट्स इंडिया लिमिटेड के नाम से तीन चिटफंड कंपनियों बनाई थी।
इन कंपनियों ने चार साल में रकम दोगुना करने का झांसा देकर पब्लिक से रकम बटोरी थी। इस काम के लिए एजेंट्स की पूरी फौज थी, जो लोगों को झांसा देकर रकम इकट्ठा करती थी। मां - बेटे खुद तो डायरेक्टर थे ही, इन्होंने राकेश कुमार वर्मा पुत्र शांति प्रसाद वर्मा को भी डायरेक्टर नियुक्त कर रखा था।
लालच में फंसे लोग आंखें मूंदकर कंपनी में अपनी खून पसीने की कमाई को खपाते रहे। कंपनी बदले में इन्हें बांड्स देती रही। लेकिन जब बांड्स की मैच्योरिटी डेट आना शुरू हुईं तो कंपनी का असली चेहरा सामने आने लगा था।
पहले तो कंपनी टालमटोल करती रही लेकिन फिर अपना बोरिया बिस्तर समेटना शुरू कर दिया था। एजेंट गजेंद्र सिंह पुत्र कालू सिंह ने मझोला थाने में सुषमा देवी और उनके बेटे मोहित अग्रवाल व पति लक्ष्मी शंकर अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज कराया था। पुलिस सुषमा और लक्ष्मी शंकर अग्रवाल को जेल भेज चुकी है।
इसके अलावा किसी दूसरे आरोपी को नहीं पकड़ पाई है। जबकि इस पूरे खेल के पीछे एक भाजपा नेता का हाथ है। बताया जा रहा है कि मोहित और उसके दूसरे भाई अमित ने भाजपा नेता के साथ मिलकर चिटफंड कंपनी शुरू की थी। कुछ माह पहले संदिग्ध हालत में अमित की मौत हो गई थी। तब भी भाजपा नेता का नाम उछला था। लेकिन बाद में वह मामला शांत हो गया था।