दीन दयाल नगर निवासी व प्रथमा बैंक की मैनेजर रेनू भटनागर ने सात दिन तक मौत से संघर्ष किया। इन सात दिनों में उन्होंने आंखें तो खोलीं। लेकिन कुछ बोल न सकीं। चाकू के हमले से उनका लीवर और आंतें फड़ चुकीं थीं। जिस कारण काफी खून बह गया। एक बार शरीर ने साथ छोड़ा तो दोबारा उसमें जान नहीं पड़ पाई। परिजन और रिश्तेदार उनके ठीके होने की दुआएं कर रहे। लेकिन गुरुवार शाम उन्होंने नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में दम तोड़ दिया।
शुक्रवार शाम रेनू भटनाकर का शव नोएडा से उनके घर दीन दयाल नगर पहुंचा तो सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। कालोनी के लोगों के अलावा, रिश्तेदार, परिचित और उनके स्टाफ के लोग भी पहुंच गए। इस भीड़ में हर कोई रेनू और उनके परिजनों के बारे में ही सोच रहा था। सभी की आंखों से आंसू छलक रहे थे। सिविल लाइंस थानाक्षेत्र में दीनदयाल नगर फेस-टू में रेनू भटनागर का मकान है। दस जून को सुबह साढ़े सात बजे रामगंगा विहार स्थित प्रथमा बैंक की मैनेजर रेनू भटनागर और उनके पति व एलआईसी अफसर सुधीर भटनागर, बेटे यथार्थ पर बदमाशों ने चाकू से हमलाकर लहूलुहान कर दिया था।
बदमाश लूटपाट करने के इरादे से घर में घुसे थे। लेकिन शोर शराबा होने पर बिना लूटपाट किए ही चले गए थे। तीनों घायलों को कॉसमॉस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां हालत में सुधार नहीं होने पर बाद में उन्हें नोएडा के फोर्टिस अस्पताल रेफर कर दिया गया था। गुरुवार की शाम रेनू ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। शुक्रवार शाम करीब सात बजे नोएडा से पोस्टमार्टम के बाद रेनू भटनागर का शव उनके घर दीन दयाल नगर पहुंचा।
शव देख दीन दयाल नगर वासी रो पड़े। परिजन और रिश्तेदार सुधीर को संभालते ही कोशिश करते रहे। लेकिन उनकी आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे थे। जबकि बेटा अभी अस्पताल में ही भर्ती है। सुधीर भटनागर की हालत में कुछ सुधार है। लेकिन पत्नी की मौत और बेटे की गंभीर हालत ने उन्हें तोड़ दिया है। परिजनों ने बताया कि शनिवार सुबह आशियाना कालोनी स्थित मोक्षधाम पर रेनू भटनागर के शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
प्रथमा बैंक परिसर में शोक सभा आयोजित
मुरादाबाद। रामगंगा विहार स्थित प्रथमा बैंक परिसर में शुक्रवार शाम शोक सभा आयोजित की गई। जिसमें उपस्थित अधिकारी और कर्मचारियों ने मोमबत्ती जलाकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। रेनू भटनागर की मौत से पूरा स्टाफ दुखी है। इस घटना की कड़े शब्दों में घोर भर्त्सना करता है। सभी बैंक कर्मचारी अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।