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योगी जी! घोटालों में फंसे इन हाकिमों पर कब होगी कार्रवाई-City

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मुरादाबाद।
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नौकरशाही सरकार के दावे को पलीता लगा रही है। खासकर भ्रष्टाचार के मामलों में अफसरों का नरम रवैय्या सरकार की साख को बट्टा लगा रहा है। मुरादाबाद में 200 करोड़ रुपये के अर्बन सीलिंग भूमि घोटाले से जेल भूमि घोटाला तक एक साल में सामने आ चुका है। इन घोटालों में पूर्व डीएम से लेकर एडीएम सिटी समेत कई बड़े अफसरों के नाम शामिल हैं। लेकिन दो - दो मंडलायुक्तों की रिपोर्ट के बावजूद आरोपी अफसरों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। बेसिक शिक्षा विभाग से लेकर ट्रेजरी कांड तक ऐसे कई घोटाले हुए हैं, जिन्हें लेकर भाजपा नेताओं ने भी आवाजें उठाईं, पर दागी अफसर अभी तक महफूज हैं।


200 करोड़ के सीलिंग भूमि घोटाले में लीपापोती
- घोटाले में पूर्व डीएम और एडीएम सिटी का भी नाम
मुरादाबाद।
मार्च 2016 से अप्रैल 2017 के बीच तत्कालीन अफसरों ने प्रापर्टी डीलरों से मिलकर एमडीए के कब्जे वाली अर्बन सीलिंग की करीब 68000 वर्ग मीटर भूमि ‘बेच’ डाली। करीब 200 करोड़ रुपये की भूमि कथित किसानों के पक्ष में छोड़ दी गई। जिस पर एमडीए सड़क, पार्क आदि बनाकर योजनाएं विकसित कर चुका था। पूर्व कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू के आदेश पर हुई जांच में पूर्व डीएम जुहैर बिन सगीर, तत्कालीन एडीएम सिटी एके श्रीवास्तव, दो तहसीलदार, अर्बन सीलिंग के एई और अन्य कई अफसरों का नाम सामने आया। कमिश्नर ने इसे आपराधिक षडयंत्र बताते हुए घोटाले में शामिल सभी अफसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश दिए थे। लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। अलबत्ता डीएम ने पूर्व डीएम व एडीएम के आदेश निरस्त कर भूमि एमडीए के नाम फिर से दर्ज कर दी। एल वेंकटेश्वर लू के बाद आए मंडलायुक्त राजेश कुमार सिंह ने भी दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए। लेकिन अभी तक इस मामले में फंसे बड़े अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ अर्बन सीलिंग के एक एई को निलंबित किया गया है। दो बाबुओं का चार्जशीट दी गई है। करोड़ों रुपये के घोटाले में फंसे बड़े अफसरों को आईएएस लॉबी बचाने में जुटी है। पूर्व कमिश्नर राजेश कुमार सिंह ने शासन को कई रिमाइंडर भी भेजे। लेकिन पूर्व डीएम और एडीएम के साथ ही घोटाले में फंसे तहसीलदारों व लेखपालों तक के खिलाफ अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मौजूदा एडीएम सिटी ने भी अपनी जांच में कहा है कि अपने पद का दुुरुपयोग करके गलत ढंग से झूठी आख्या लगाकर 68000 वर्ग मीटर भूमि को छाड़ा गया।
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600 बीघा सरकारी भूमि बेचने वाले भी महफूज
- कब्जा करने वालों में सपा, भाजपा के नेता भी शामिल
मुरादाबाद।
कांठ तहसील में ग्राम समाज की करीब 600 बीघा भूमि अफसरों और नेताओं के गठजोड़ ने ठिकाने लगा दी। पूर्व एसडीएम संत कुमार ने सरकारी भूमि सपा और भाजपा से जुड़े प्रापर्टी डीलरों के नाम कर दी। कब्जा करने वालों में सपा और भाजपा के कुछ नेता भी शामिल हैं। पूर्व मंडलायुक्त राजेश कुमार सिंह के समय में हुई जांच में यह घोटाला पकड़ में आया था। कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम संत कुमार को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन सरकारी भूमि को ठिकाने लगाने वाले अफसरों और कब्जा करने वाले नेताओं के खिलाफ अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। एसडीएम संत कुमार भी निलंबन पर हाईकोर्ट से स्टे ले आए हैं। पूर्व कमिश्नर उनके खिलाफ जांच कर रहे थे। बुलाने पर भी वह बयान देने नहीं पहुंचे। माना जा रहा है कि नेताओं के सिंडिकेट की वजह से इसकी फाइल अब राजस्व परिषद में तलब कर ली गई है। इसके बाद से स्थानीय स्तर पर कार्रवाई रुक गई है। जिला प्रशासन ने इस घोटाले में शामिल नेताओं और अफसरों के खिलाफ न तो कोई प्रभावी कार्रवाई की और न ही रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की।


जेल भूमि घोटाले में भी नहीं हुई कार्रवाई
मुरादाबाद।
नई जेल के लिए हुई भूमि खरीद में अफसरों ने बड़ा खेल किया। जांच में इस बात का खुलासा हो चुका है। एडीएम प्रशासन अपनी जांच में कह चुके हैं कि पूर्व में तैनात अफसराें ने जेल प्रोजेक्ट के ठीक बगल में शहर के एक होटल संचालक सौरभ जैन को करीब तीन एकड़ भूमि खरीदवाई। जेल प्रोजेक्ट के दायरे में नहीं होने के बावजूद चंद दिनों में ही इस भूमि को चार गुना दाम पर अफसराें ने सरकार के नाम पर खरीद लिया। बाद में यह भूमि जेल प्रोजेक्ट के अंदर स्थित वक्फ की भूमि से एक्सचेंज कर ली गई। मुनाफे की रकम अफसरों तक भी पहुंची। इस घोटाले में भी पूर्व एसडीएम, तहसीलदार और लेखपाल के साथ ही एक बड़े अधिकारी का नाम भी सामने आया है। तमाम साक्ष्य सामने आने के बावजूद जिला प्रशासन ने इस मामले में भी अभी तक रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है।


स्टूडेंट प्रोफाइल प्रिंटिंग घोटाले को दबा गए अफसर
मुरादाबाद।
बेसिक शिक्षा विभाग में हुए स्टूडेंट प्रोफाइल प्रिंटिंग घोटाले को भी अफसरों ने दफन कर दिया है। पूर्व बीएसए संजय सिंह के कार्यकाल में जिले के छह लाख से अधिक बच्चाें की प्रोफाइल प्रिंटिंग हुई थी। पूरे प्रदेश में प्रोफाइल प्रिंटिंग का काम छह रुपये प्रति प्रोफाइल की दर से कराया गया था। लेकिन मुरादाबाद में यही काम 13 रुपये से भी अधिक की दर पर हुआ। भाजपा के महानगर अध्यक्ष महेंद्र गुप्ता ने डीएम से शिकायत की। जांच बैठी, जिसमें साबित हुआ प्रोफाइल प्रिटिंग का ठेका दोगुनी से भी अधिक दर पर दिया गया है। जांच के बाद ठेका तो निरस्त कर दिया गया लेकिन घोटाले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अफसरों ने बचा लिया। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।



फाइलों में दब गया निलंबन - तबादले का खेल
मुरादाबाद।
बेसिक शिक्षा विभाग में पूर्व बीएसए संजय सिंह ने 29 शिक्षक - शिक्षिकाओं को निलंबित किया और फिर उन्हें चंद दिनों में सवेतन बहाल करके मनचाही जगह तैनाती दे दी। पूर्व बीएसए ने यह रास्ता तबादलों पर लगी रोक की काट निकालते हुए किया था। जिले में दूर - दराज ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात शिक्षक - शिक्षिकाओं को उनकी रजामंदी से निलंबित किया गया था ताकि उन्हें बहाल करके फिर नए सिरे से मनचाही तैनाती दी जा सके। भाजपा नेताओं की शिकायत पर डीएम ने जांच बैठाई। जांच में ऐसे 29 शिक्षक - शिक्षिकाओं के नाम सामने आए। जिन्हें बीएसए ने ‘गेम फिक्स’ करके निलंबित किया था। जांच तो हुई लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। फाइलों को दबा दिया गया।


समायोजन की जांच आज तक खत्म नहीं
मुरादाबाद।
सपा सरकार के समय में शिक्षा विभाग में समायोजन का खेल चला। बेसिक शिक्षा विभाग में शासन की रोक के बावजूद बड़े पैमाने पर पूर्व अफसरों ने शिक्षकों के समायोजन किए। भाजपा सरकार बनने के बाद इन सभी मामलों पर जांच बैठी। शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों की इसमें गर्दनें फंसीं। लेकिन यह जांच समय के साथ दबा दी गई। जांच रिपोर्ट आज तक पूरी नहीं हुई। सरकार के कार्रवाई के दावे की जांच फाइलों के साथ ही दबकर रह गए।
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ट्रेजरी का खजाना ‘लूटने’ वाले भी महफूज
मुरादाबाद।
सरकार की सबसे सुरक्षित तिजोरी ट्रेजरी से 10 करोड़ रुपये ‘लूटने’ वाले भी अभी तक महफूज हैं। फर्जी दस्तावेजों के जरिए पांच साल तक अफसरों की आंखों में धूल झाेंककर ट्रेजरी से रकम निकाली जाती रही। कलक्ट्रेट के बाबुओं से लेकर ट्रेजरी के ओहदेदारों तक की भूमिका जांच में उजागर हो चुकी है। आंख मूंदकर फाइलों को सरकाने वाले कई अफसर भी सवालों के घेरे में हैं। बावजूद इसके इस मामले में कार्रवाई सिर्फ एक सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक तक सिमटी है। अधिकारियों का दावा है कि सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक अकेले ही इस खेल को अंजाम देता रहा। सरकारी कुर्सियों पर बैठे हाकिम कई सालों तक भी उसकी कारगुजारी को नहीं पकड़ सके। सूत्रों का दावा है कि सरकारी खजाने को सरेआम लूटने के इस खेल में कई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें बचाया जा रहा है।
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