ट्रेजरी घोटाले का मास्टरमाइंड पूर्व लेखपाल अरुण भटनागर पुलिस से बचने के लिए दिल्ली में जा छुपा है। पुलिस इस घोटाले की रकम को अपने खातों में मंगाने वाले उसके रिश्तेदारों को भी नहीं पकड़ सकी है। सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक और पूर्व लेखपाल की मदद करने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने बताया कि लेखपाल की नौकरी छोड़ चुका बिलारी निवासी अरुण भटनागर ट्रेजरी घोटाले का मास्टरमाइंड है। बाकी सभी आरोपी उसके बताए प्लान के मुताबिक ही काम करते थे। एडीएम ने बताया कि अरुण की गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले के बाकी राज भी खुलेंगे। पुलिस उसे पकड़ने की कोशिश में लगी है। लेकिन वह दिल्ली में कहीं जा छुपा है। जल्द उसे ट्रेस करके गिरफ्तार कर लिया जाएगा। अरुण ने घोटाले के 1.24 करोड़ रुपये अपने रिश्तेदारों हिमांशु सक्सेना, कांति देवी, ज्योति भटनागर और शकुंतला भटनागर निवासी बरवलान के बैंक खातों में डलवाए थे। इन सभी की तलाश भी पुलिस कर रही है। दो दिन पहले पुलिस इस घोटाले में चार नए आरोपियाें पवन कुमार यादव निवासी रामनगर गंधपुर बिलारी, विशाल यादव निवासी दयानंद कालोनी पीतल नगरी मुरादाबाद और बिलारी के बहादुरपुर निवासी किसान परवीन सिंह व महेंद्र सिंह को गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है। सेवानिवृत्त भूलेख लिपिक मिलन विहार निवासी अनिल मेहरोत्रा को 23 मार्च को ही गिरफ्तार कर लिया गया था।