मुरादाबाद। घर की चहारदीवारी के अंदर रहने वाली महिलाओं की जिंदगी में स्वयं सहायता समूह ने बड़ा बदलाव ला दिया है। अब महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी तकदीर संवारने में जुट गई हैं। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि आमदनी का मजबूत जरिया भी मिल गया है। ठाकुरद्वारा के बैजनाथपुर की रहने वाली गंगा शक्ति स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। यह महिलाएं गोबर से जैविक खाद तैयार कर हर माह 50 हजार रुपये कमा रही हैं।
डेढ़ साल पहले तीन दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह की महिलाओं ने खाद तैयार करने का काम शुरू किया था और अब तक 900 क्विंटल जैविक खाद बेचकर करीब सात लाख रुपये की कमाई की है। समूह को संचालित करने वाली दीपाली चौहान ने बताया कि घर के पास ही गोबर की मदद से खाद बनाना शुरू किया था।
शुरुआत में उत्पादन कम ही हो पाता था, लेकिन विभिन्न सरकारी कार्यक्रम में स्टाल लगाकर जब खाद को बेची तो अच्छे ऑर्डर मिलने लगे। अब उत्तराखंड तक खाद की सप्लाई हो रही है। समूह में छह सदस्य हैं और जरूरत के हिसाब से कुछ महिलाओं को दिहाड़ी पर रखा जाता है। समूह को हर महीने करीब 50 हजार रुपये मुनाफा हो जाता है।
समूह से जुड़ी शारदा चौहान ने कहा कि सभी महिलाएं गृहिणी हैं। घर बैठे सभी को अच्छा काम मिल गया। जिसकी मदद से घर का खर्च चलाने में भी महिलाएं मदद कर रही हैं। खाद का एक किलो का पैकेट 15 रुपये का है, वहीं एक क्विंटल खाद की कीमत 1200 रुपये है।
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शुरुआत में सुनने पड़े ताने
समूह की महिलाओं का कहना है कि जब काम शुरू किया था तो उन्हें घरवालों के साथ पड़ोसियों के भी ताने सुनने पड़े थे। सभी लोग कर रहे थे इसमें कमाई क्या होगी, लेकिन जब हमारे पास ऑर्डर आने लगे और उत्तराखंड तक सप्लाई होने लगी है तो लोग हमारी सराहना करते हैं। अब सभी का लक्ष्य इस खाद को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने का है। साथ ही खाद की आपूर्ति अन्य राज्यों में भी करने का लक्ष्य है।
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