मुरादाबाद। जलकल महकमे में पानी की लाइन बिछाने, नलकूप बोरिंग और हैंडपाइप लगाने के निर्माणों मेें गड़बड़झाले की फिर से आहट सुनाई देने लगी है। ऐसे निर्माणों की 619 फाइलें जांच के घेरे में आ गई हैं जहां के डिस्पैच लेटर जारी ही नहीं हुए थे। महाप्रबंधक (जलकल) ने ठेकेदारों के भुगतान रोकने के बाद सभीनिर्माणों के सत्यापन अपनी निगरानी में करवाने को कहा है। बड़े पैमाने पर निर्माण जांच की परिधि में आने से महकमा में हड़कंप मचा हुआ है।
वित्तीय वर्ष 2019-20 में जलकल विभाग के विभिन्न वार्डों में पानी की लाइन, नलकूप बोरिंग, हैंडपाइप लगाने के 619 काम शुरू कराए गए थे। करीब 5.5 करोड़ की लागत के इन निर्माणों के वर्कआर्डर जारी हुए और टेंडर प्रक्रिया पूरी कराई गई। अफसरों के मुताबिक बिना डिस्पैच लेटर जारी हुए ठेकेदारों ने दावा किया कि वार्डों में निर्माण के काम पूरे कराए गए। नियमानुसार डिस्पैच लेटर जारी होने के बाद ही निर्माण कराए जा सकते हैं। यही वजह है कि सभी 5.5 करोड़ के निर्माणों पर जांच बैठाई गई है। बताया यह जा रहा है कि कई जगह ऐसी हैं जहां मौके पर काम ही नहीं हुए हैं। बिना काम कराए ही बिल पेश कर दिए गए हैं। अब जांच में दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
पहले भी निर्माणों में सामने आई है धांधली
वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी जलकल विभाग के 682 निर्माणों के वर्कआर्डर तत्कालीन महाप्रबंधक एसपी श्रीवास्तव ने निरस्त किए थे। इनके भौतिक सत्यापन में 125 निर्माण मौके पर नहीं होना पाया गया। जबकि करीब चार सौ निर्माणों के भुगतान होने के बाद वर्कआर्डर निरस्त करने पर सवाल खड़े हुए थे। यह दीगर है कि पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
- जलकल निर्माणों में गड़बड़ी की आशंका में सत्यापन कराए जा रहे हैं। अगर निर्माणों में धांधली नहीं मिलती है तो ठेकेदारों के भुगतान करा दिए जाएंगे।
- प्रमोद कुमार गुप्ता, महाप्रबंधक (जलकल)