वैश्विक महामारी कोरोना की रोकथाम में स्वास्थ्य विभाग के वॉरियर्स का सबसे अहम योगदान है। वारियर्स अपनी जान जोखिम में डालकर फर्ज निभा रहे हैं। एक्टिव और पैसिव क्वारंटीन होने से कोई महीने भर से घर नहीं लौटा है। कोई घर जाकर भी अपनों के बीच साथ नहीं बैठ पा रहा है।
मुरादाबाद में अन्य वॉरियर्स के अलावा दो ऐसे परिवार भी हैं जिनमें पति-पत्नी और पिता व बेटा कोरोना ड्यूटी कर रहे हैं। ड्यूटी के चलते दोनों परिवार अलग-अलग रहने को मजबूर हैं।
अमित कुमार दोहरे जिला अस्पताल में लैब टेक्नीशियन हैं। कोरोना आशंकित और आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के रिपीट सैंपल लेते हैं। अमित की पत्नी प्रतिभा सहारनपुर राजकीय मेडिकल कालेज में स्टाफ नर्स हैं। प्रतिभा भी आइसोलेशन ड्यूटी कर रही हैं।
कोरोना की ड्यूटी ने उनके दो बच्चों को भी बांट दिया है। दो साल का बेटा विहान अमित के साथ और सात साल की बेटी परिधि प्रतिभा के साथ रहती है। लॉकडाउन के बाद से अमित और प्रतिभा की मुलाकात नहीं हुई है।
दोनों वीडियो कॉलिंग पर बात कर ड्यूटी के अनुभव साझा करते हैं। दो साल का बेटा मां के पास जाने की जिद करता है। लेकिन पति-पत्नी अपना फर्ज निभा रहे हैं।
जिला अस्पताल के मेस प्रभारी नारायण दत्त भट्ट और उनका बेटा विपिन भट्ट भी कोरोना वारियर्स हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों का खाना मेस में ही तैयार होता है। जबकि विपिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुंदरकी में ब्लॉक लेखा प्रबंधक हैं।
विपिन की कोरोना ड्यूटी लगी है। नारायण दत्त अस्पताल परिसर स्थित क्वार्टर और विपिन परिवार के साथ बैंक कालोनी में रह रहा है। पिता और बेटे की करीब एक महीने से मुलाकात नहीं हुई है।