गुलाम अली की मशहूर गजल है -चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले। पर कोरोना की काली छाया के बीच पौधशालाओं तक कोई नहीं पहुंच पा रहा। लिहाजा गुलों का कारोबार ठप्प पड़ा है। कभी गजरौला से फूल दूर-दूर तक जाते थे। लेकिन अब फूलों के पौध नर्सरी में ही पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। कारोबार से जुड़े लोगों को औसतन एक लाख रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। वहीं सबसे अधिक चिंता महंगे बिकने वाले फूलों के पौधों की है। यदि इस माह के अंत तक इनके खरीदार नहीं मिले तो लगभग एक लाख पौधे नर्सरियों में रखे-रखे ही नष्ट हो जाएंगे।
जनपद अमरोहा में तहसील मंडी धनौरा के ब्लॉक गजरौला में बड़े पैमाने पर नर्सरी का कारोबार होता है। नगर के साथ ही गांव सिहाली जागीर, छोया, कटाई, भीकनपुर, लिसड़ई, मनौटा, खादगूजर, मझोला, फौंदापुर, सिहाली मेव, चकनवाला, ख्यालीपुर, कांकाठेर आदि में लगभग एक हजार से अधिक छोटी-बड़ी नर्सरी हैं। सबसे अधिक नर्सरी गजरौला-हसनपुर मार्ग पर गांव सिहाली जागीर के आसपास हैं।
नर्सरी संचालकों के मुताबिक यहां से सीजन में औसतन 70 से सौ तक ट्रक पेड़-पौधे प्रतिदिन दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड आदि राज्यों के साथ ही नोएडा, गाजियाबाद, अमरोहा, मुरादाबाद, बरेली , लखनऊ आदि स्थानों पर जाया करते थे। लॉकडाउन की वजह से कारोबार बंद पड़ा है। हालांकि नर्सरी को जीवित रखने के लिए इनमें नलाई, गुड़ाई, सिंचाई का काम रोजाना हो रहा है। भीषण गर्मी में यदि एक भी दिन लापरवाही बरती तो पेड़-पौधे सूख जाएंगे।
नर्सरी संचालकों का कहना है कि जीनिया, कूंचिया, सालविया एवं विगोनिया समेत विभिन्न नायाब प्रजातियों के लगभग एक लाख पौधे विभिन्न नर्सरी में तैयार हैं। इनमें रंग बिरंगे फूल भी महक रहे हैं, लेकिन यदि अप्रैल माह के अंत तक इनके खरीदार नहीं मिले तो ये रखे-रखे ही नष्ट हो जाएंगे। इससे कारोबारियों को पचास लाख से अधिक का नुकसान पहुंचेगा।
हसनपुर रोड पर नौशे खां नर्सरी के संचालक नौशे खां का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से भले ही कारोबार बंद है, लेकिन नर्सरी संचालक देखरेख तो बराबर करा रहे हैं। बिजली का बिल, मजदूरों की दिहाड़ी ने ही हमारी कमर तोड़ी हुई है। यदि लॉकडाउन शीघ्र नहीं खुला तो नर्सरी संचालक आर्थिक रूप से टूट जाएंगे।
हाईवे पर ग्रीन व्यू एंड फार्म्स नर्सरी के संचालक मुकेश गोयल कहते हैं कि लॉकडाउन में सबसे अधिक नुकसान नर्सरी कारोबार को ही पहुंचा है। सैकड़ों प्रजातियों के सीजनल फूल वाले पौधे ग्राहक नहीं मिलने के कारण सूखने के कगार पर हैं। बरसात के मौसम में तो नर्सरी कारोबार पर आया संकट और गहरा जाएगा।