मुरादाबाद। नवाबपुरा में मेडिकल और पुलिस टीम पर हमला करने वाले कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें समझाने की भरसक कोशिशें कीं लेकिन हमलावर तो मानो पहले से ही मन बनाकर बैठे थे। पुलिस ने इस पूरे वाकये को थाने की जीडी और फिर एफआईआर में बयां किया है। पुलिस का कहना है कि भीड़ हिंसक थी और कुछ सुनने को तैयार नहीं थी। जब लोगों को यह समझाने की कोशिश की गई कि मेडिकल टीम उन्हीं की भलाई के लिए उन्हें लेने आई तो लोग चिल्लाने लगे। बोले, कोरोना संक्रमण फैलना है तो फैलने दो, हम मेडिकल टेस्ट नहीं कराने देंगे। इसके साथ ही हमलावरों ने धारदार हथियारों और लाठी डंडों से डाक्टर और मेडिकल टीम पर हमला बोल दिया।
अचानक हुए हमले से पुलिस वाले भी कुछ समझ नहीं पाए। भीड़ लगातार चिल्लाए जा रही थी कि कोरोना संक्रमण फैलना है फैले लेकिन वह टेस्ट हरगिज नहीं कराएंगे। इससे पहले कि पुलिस वाले कुछ समझ पाते हमलावरों ने लाठी डंडों और धारदार हथियारों से अचानक डाक्टर और स्वास्थ्य टीम पर हमला बोल दिया। मौके पर मौजूद चौकी इंचार्ज नागफनी राजकुमार ने भीड़ को रोकने की कोशिश की लेकिन भीड़ किसी की सुनने को तैयार नहीं थी। इतने में पथराव हो गया और डाक्टर व बाकी मेडिकल टीम को जान बचाना मुश्किल हो गया। चौकी इंचार्ज ने तुरंत कंट्रोल रूम को हमले का मैसेज दिया। मौके पर मौजूद पुलिस वाले भी छत से बरसते पत्थरों के बीच जान बचाने को जहां - जहां भागने लगे। सिपाही राहुल और निशांत मलिक भी पत्थर लगने से जख्मी हो गए। मौके पर आए एसओ नागफनी को भी भागकर एक घर में छुपकर जान बचानी पड़ी। पुलिस की जीप, एंबुलेंस और डाक्टर की टाटा सूमो गाड़ी को हमलावरों ने तोड़ डाला। भीड़ पूरी टीम को जान से मार देने पर आमादा थी। छतों और गलियों से हो रहे भीषण पथराव के बीच स्थानीय पुलिस भी चाहकर कुछ नहीं कर पा रही थी। इधर से बचाव के लिए मेडिकल टीम के चीखने चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं तो दूसरी तरफ से रह रहकर हमलावरों की आवाजें गूंज रही थीं कि फैलने दो कोरोना संक्रमण, हरगिज नहीं कराएंगे मेडिकल टेस्ट। घटना को याद करके स्वास्थ्य कर्मी सिहर उठते हैं। मानो उन्होंने जिंदा बचकर निकलने की उम्मीद ही छोड़ दी थी।