लॉकडाउन में इलाज नहीं मिलने की वजह से मंगलवार को एक युवक ने दम तोड़ दिया। बिलारी के गांव सैफनी अकबरपुर निवासी गोपाल सिंह (22) ने मंगलवार दोपहर जिला अस्पताल में दम तोड़ा था। परिजनाें का कहना है कि वह गोपाल को इलाज के लिए दो निजी अस्पतालों में लेकर गए थे।
लेकिन वहां डाक्टरों ने उसे कोरोना आशंकित बताकर इलाज करने से इंकार कर दिया था। कोरोना आशंकित मरीज की मौत की सूचना से हड़कंप शासन तक मचा तो बुधवार को सीएमओ की अगुवाई में मेडिकल टीम पीड़ित के गांव पहुंची।
सीएमओ का कहना है कि युवक डायरिया से पीड़ित था उसकी मौत कोरोना से नहीं बल्कि इलाज में देरी की वजह से हुई थी। सीएमओ ने दोनाें अस्पतालाें को नोटिस भी जारी किया है।
गोपाल को मंगलवार दोपहर 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया था। उसे तेज बुखार था। करीब आधा घंटा बाद ही उसने दम तोड़ दिया था। परिजनाें ने बताया कि युवक मजदूरी करता था। बुखार आने पर उसे बिलारी में ही दिखाया था।
बिलारी में डाक्टराें ने कोरोना आशंकित बताकर उसे मुरादाबाद रेफर कर दिया था। परिजनाें का कहना है कि सोमवार को ही वह युवक को लेकर एपैक्स और टीएमयू के अस्पताल में गए थे।
लेकिन बुखार और डायरिया से पीड़ित गोपाल में कोरोना के लक्षण बताकर दोनाें अस्पतालाें ने ही उसे एडमिट करने से मना कर दिया था। निजी अस्पतालाें द्वारा एडमिट नहीं किए जाने से हताश परिजन गोपाल को लेकर घर लौट गए। मंगलवार को उसकी हालत अचानक तेजी से बिगड़ी तो परिजन उसे बिलारी के सरकारी अस्पताल ले गए। बिलारी अस्पताल से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था। लेकिन आधा घंटे में ही गोपाल की मौत हो गई।
कोरोना आशंकित मरीज की मौत की बात तेजी से पूरे इलाके में फैली तो लोगों में हड़कंप मच गया। बात जिला प्रशासन तक पहुंची तो डीएम ने सीएमओ को खुद गांव जाकर मामले की जांच करने के आदेश दिए। सीएमओ डा. एमसी गर्ग के नेतृत्व में बुधवार सुबह स्वास्थ्य विभाग की टीम मृतक युवक के घर पहुंची।
युवक के बारे में जानकारी जुटाई गई। पता चला कि युवक न तो विदेश गया था और न ही विदेश से लौटे किसी व्यक्ति के संपर्क में आया था। इसके बाद सीएमओ डा. एमसी गर्ग ने दिल्ली रोड के दोनों अस्पतालों के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है। सीएमओ ने कहा कि निजी अस्पताल किसी भी इमरजेंसी मरीज को भर्ती करने से मना नहीं कर सकते हैं।
लॉकडाउन में निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद की गई हैं, लेकिन इमरजेंसी सेवाओं को बहाल रखा गया है। अस्पतालों को निर्देश हैं कि इमरजेंसी पहुंचने वाले गंभीर मरीजों को भर्ती करने में किसी तरह की लापरवाही नहीं की जाएगी। इसके बाद भी निजी अस्पताल इमरजेंसी मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं।
युवक को बुखार और पेट में संक्रमण था। उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। मरने वाले युवक में कोरोना का कोई लक्षण नहीं था। उसने न तो कोई विदेश यात्रा की थी और न ही वह विदेश यात्रा से लौटे किसी व्यक्ति के संपर्क में आया था। युवक को भर्ती करने से इंकार करने वाले दोनों अस्पतालाें को नोटिस जारी किया गया है। इलाज से इंकार करने वाले डाक्टरों के पंजीकरण निरस्त किए जाएंगे। - डा. एमसी गर्ग, सीएमओ।
हमें नोटिस मिलेगा तभी इस पर कोई अधिकारिक बयान देंगे। फिलहाल हमें सीएमओ की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है। - डा. एमपी सिंह, टीएमयू।
- सीएमओ कार्यालय से इसकी जानकारी मिलने पर ड्यूटी स्टाफ से मरीज के बारे में जानकारी जुटाई गई। उक्त मरीज की अस्पताल आने का कोई रिकार्ड नहीं है। सीएमओ कार्यालय को लिखित जवाब भेज दिया है। - डा. मगन मेहरोत्रा, निदेशक एपेक्स हास्पिटल