मुरादाबाद। नौ साल की बच्ची से दुष्कर्म करने के दोषी अधेड़ व्यक्ति को न्यायालय ने अंतिम सांस तक कठोर श्रम के साथ कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
नागफनी थानाक्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने आठ जनवरी 2019 को मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उसने बताया था कि उसकी एक नौ वर्षीय बेटी की अचानक तबीयत खराब होने लगी थी। वह बेटी को डॉक्टर के पास दिखाने लगे गई। तब बच्ची ने आपबीती सुनाई। उसने बताया कि पांच दिन पहले जब घर में कोई मौजूद नहीं था। तब पड़ोस में रहने वाला 55 वर्षीय मजदूर आया था। इसके बाद वह बच्ची को घर के पास बन रहे मकान में ले गया था, जहां उसने बच्ची से दुष्कर्म किया था। इसके बाद भी लगातार डरा धमकाकर दुष्कर्म किया। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मुकदमे की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट संख्या तृतीय सुभाष सिंह की अदालत में की गई। विशेष लोक अभियोजक अकरम खान एवं एमपी सिंह ने बताया कि नाबालिग पीड़िता ने अदालत के समक्ष पेश होकर आरोपी द्वारा किए गए जघन्य अपराध को उजागर किया। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि वादिनी और आरोपी आसपास के रहने वाले हैं। दोनों के बीच रुपये के लेनदेन को लेकर झगड़ा हुआ था। आरोपी को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। अभियोजन एवं बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद तथ्य और साक्ष्य के आधार पर अदालत ने आरोपी को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने का दोषी करार देते हुए उसे उसकी अंतिम सांस तक के कठोर श्रम के साथ कारावास की सजा सुनाई। दुष्कर्म के दोषी को जेल भेज दिया गया।
एक साल में 18 पीड़िताओं को अभियोजन पक्ष दिला चुका इंसाफ
मुरादाबाद। अभियोजन पक्ष की कड़ी मेहनत के कारण एक साल में 18 पीड़िताओं को न्याय मिला है। पॉक्सो कोर्ट तृतीय मे सरकार की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक अकरम खान एवं एमपी सिंह ने बताया कि इस एक साल में अट्ठारह मुकदमों की पीड़िताओं को न्याय दिला चुके हैं। इनमें मुख्य रूप से थाना मझोला, कांठ, बहजोई, नागफनी के मुकदमे हैं। जिनमें आरोपियों को दस साल की सजा से लेकर अंतिम सांस तक के कारावास की सजा शामिल है। दोनों ही विशेष लोक अभियोजकों के उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया है।