मुरादाबाद। हम अपनी क्षमता को ही नहीं पहचान पाते। ऐसे में बिना प्रयास किए ही परिणाम के बारे में सोचकर तनाव लेते हैं, जबकि परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए सार्थक तनाव जरूरी है। यह जानकारी छात्राओं को मनोविश्लेषक डॉ. मीनू मेहरोत्रा ने दी। उन्होंने छात्राओं के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को भी शांत किया।
कौशल्या कन्या इंटर कॉलेज में अमर उजाला की ओर से अपराजिता अभियान के तहत तनाव प्रबंधन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि मनोविश्लेषक डॉ. मीनू मेहरोत्रा ने कहा कि जब हमें अपने लक्ष्य की जानकारी होती है और ईमानदारी से प्रयास करते हैं तो परिणाम प्राप्त करने की समय सीमा कम हो जाती है।
तनाव और चिंता हर बार गलत नहीं होती। कई बार प्रेरित होने के लिए कुछ तनाव जरूरी होता है। इसे सार्थक तनाव कहते हैं। जैसे परीक्षा से पहले पढ़ाई के लिए ज्यादा समय देना और एकाग्रचित्त होकर अभ्यास करना जरूरी है। इसलिए जरूरत यह समझने की है कि तनाव कहां सार्थक है और कहां निरर्थक। परीक्षा का फोबिया तब तक रहता है, जब तक सफलता नहीं मिलती। दृढ़ निश्चय करो और डर को सामने लाओ। हर दिन अपना आत्म मूल्यांकन करो कि कहां कमी रह गई। तकनीक के साथ प्रयास बढ़ाओ, उसमें रुचि लो और लगातार सीखते रहो। इस दौरान प्रधानाचार्य डॉ. मधुबाला त्यागी, शिक्षिका शिल्पी ने भी छात्राओं को प्रोत्साहित किया।
छात्राओं को दिए टिप्स
यदि किताब देखकर डर लगे तो उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर दिन के हिसाब से तय कर लें। इससे पाठ्यक्रम कम लगेगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा। जो विषय कठिन लगे उसे छोड़ने के बजाय उसका अभ्यास बढ़ा दें, सफलता जरूर मिलेगी।