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Moradabad News: कंपनी बागः एक सांस्कृतिक विरासत

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मुरादाबाद।
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कंपनी बाग शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। ये पार्क शहर के समृद्ध अतीत का भी गवाह है। अंग्रेज शासनकाल के दौरान ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस पार्क को बनाया था। इस पार्क का नाता 1857 की क्रांति से लेकर मौजूदा समय के आयोजनों तक रहा है।

- 1857 के गदर में जलाई गईं कोठियां
कंपनी बाग पार्क में अंग्रेजों की कोठियों को 1857 की क्रांति में जला दिया गया था। कोठियां जलाने का यह काम पुरंगा अहीर के नेतृत्व में किया गया। पुरंगा अहीर को एक अंग्रेज को थप्पड़ मारने के जुर्म में जेल में बंद कर दिया गया था। जब आजादी के दीवानों ने जेल की दीवार तोड़ी तो पुरंगा अहीर भी भाग निकले और इन इलाकों में क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया। कोठी के जलने के बाद यहां से बहुत सारे अंग्रेज भागकर नैनीताल चले गए थे।
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- बनाया गया पार्क, होती थी घुड़सवारी
- 1857 में कोठी में आग लगाए जाने के बाद इस जगह को पार्क के रूप में विकसित किया गया। यहां अंग्रेज अफसर टहलते थे और साथ ही घुड़सवारी भी करते थे। अंग्रेज अधिकारियों को हमेशा डर भी बना रहता था, इसलिए यहां बड़ी संख्या में पुलिस भी पहरा देती थी।

- पहले मेस्टर्न पार्क था नाम
कंपनी बाग को पहले मेस्टर्न पार्क के नाम से जाना जाता था। उत्तर प्रदेश के गवर्नर रहे सर जेम्स मेस्टन ने 1906 से 1912 तक इस प्रांत का कार्यभार संभाला था। उनके ही नाम पर इस पार्क का नाम मेस्टन पार्क रखा गया था। फिर वक्त के साथ इस पार्क को कंपनी बाग के नाम से जाना जाने लगा।
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- अब बना आकर्षण का केंद्र

कंपनी बाग अब शहर के प्रमुख पार्कों में से एक है। यहां समय-समय पर बड़े-बड़े आयोजन भी होते हैं और इसी के एक हिस्से में चिल्ड्रेन पार्क भी बनाया गया है, जिसमें बच्चों के मनोरंजन के लिए कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं। हाल ही में यहां स्ट्रीट वेंडिंग जोन की दुकानें खुली हैं और भूलभुलैया का निर्माण किया गया है, जोकि शहरवासियों को खूब भा रहा है।

मशाहिद अब्बास
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