अफसर, इंजीनियरों और ठेकेदार की तिकड़ी ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट हर्बल पार्क को भी नहीं बख्शा। सीएम की प्राथमिकता वाले इस प्रोजेक्ट की सैंपल रिपोर्ट लैबोरेटरी टेस्ट में फेल हो गई हैं। गुणवत्ता चेकिंग के मामले में देश की शीर्ष लैबोरेटरीज में शामिल श्री राम टेस्ट हाउस ने हर्बल पार्क के सैंपल फेल कर दिए हैं। लैब ने रिपोर्ट में कहा है कि हर्बल पार्क में इस्तेमाल निर्माण सामग्री स्तरीय नहीं है। जबकि कांट्रेक्टर को एमडीए ने टेंडर स्टैंडर्ड मैटेरियल का रेट दिया है।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण करीब 26 एकड़ जमीन में नया मुरादाबाद में हर्बल पार्क का निर्माण कर रहा है। इस पर करीब पंद्रह करोड़ रुपया खर्च किया जा रहा है। लेकिन यह प्रोजेक्ट पहले दिन से ही विवादों में घिरा है। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद ही इसके निर्माण में पीली ईंटों और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का मामला उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री आफिस से जांच बैठा दी गई थी। इसके बाद भी कभी बाल मजदूरों से काम कराने की वजह से तो कभी तय वक्त में काम पूरा नहीं होने के चलते इस प्रोजेक्ट को लेकर एमडीए की किरकिरी होती रही है।
घपले उजागर होने के बाद मार्च 2015 में ठेकेदार का कांट्रेक्ट कैंसिल करके उसे ब्लैकलिस्टेड भी कर दिया गया था। लेकिन एक वरिष्ठ प्रशासनिक अफसर ने सप्ताह भर के भीतर ही दोबारा इसी ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार के हाथों में हर्बल पार्क सौंप दिया था। अब फिर से हर्बल पार्क सुर्खियों में है। पार्क में जो वाटर लाइन बिछाई गई थी वह घटिया क्वालिटी है। बाकी निर्माण सामग्री भी तय अनुबंध के मुताबिक नहीं है। चीफ इंजीनियर इंदू शेखर हर्बल पार्क की निर्माण सामग्री के सैंपल जांच के लिए श्री राम टेस्ट हाउस को भेजे थे। जांच रिपोर्ट में पूरी वाटर लाइन को घटिया क्वालिटी का बताया गया है।
लैब की टेस्ट रिपोर्ट में हर्बल पार्क में इस्तेमाल की गई वाटर पाइप लाइन को अनुबंधित क्वालिटी का नहीं पाया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद हमने ठेकेदार का पेमेंट रोक दिया है। वाटर लाइन को उखड़वाकर ठेकेदार से स्टैंडर्ड क्वालिटी की वाटर लाइन बिछवाई जाएगी।
- जेबी सिंह यादव, वीसी एमडीए।