जिला अस्पताल में हड़ताल होने पर ओपीडी खुलने का इंतजार करते लोग
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मुरादाबाद। एमडीए के 110 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के बाद से एमडीए कर्मचारियों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन दिन ब दिन जोर पकड़ता गया। लेकिन तमाम कर्मचारी संगठनों के ज्ञापन व समर्थन के बाद भी प्रशासन नहीं चेता। आंदोलन में शामिल कर्मचारी नेताओं के एलान व चेतावनी को भी प्रशासन शुरू में हल्के में लेता रहा। शहर की सफाई व स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करने के बाद प्रशासन जागा। कमिश्नर को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।
करीब दो दशक से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के रूप में एमडीए में कार्यरत 110 कर्मचारियों की सेवाएं मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष ने 22 दिसंबर को सेवाएं समाप्त कर दी थीं। पहले इन कर्मचारियों ने व्यक्तिगत तौर पर वापसी का प्रयास किया। बात नहीं बनी तो सभी ने चार जनवरी से एमडीए कार्यालय परिसर धरना देना शुरू कर दिया। इस बीच एमडीए कर्मचारी संयुक्त संगठन भी उनके साथ आ गया। इस पर एमडीए सचिव की ओर से आंदोलनकारी कर्मचारियों को चेतावनी जारी कर डराने का प्रयास भी किया गया, लेकिन इस बीच नगर निगम कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष सुबहान व सफाई कर्मचारी नेता ओमीलाल बाल्मीकि ने पहुंच कर कर्मचारियाें का हौसला बढ़ाया। दस जनवरी से विभिन्न कर्मचारी संगठन भी उनके समर्थन में जुटने शुरू हो गए। सभी ने अधिकारियों को ज्ञापन दिया, धरना स्थल से उनकी बहाली की मांग की। मांग पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने के साथ आवश्यक सेवाएं ठप करने का भी एलान किया, लेकिन शुरू में प्रशासन इसे केवल धमकी ही मानता रहा। गुरुवार कर्मचारी संगठनों ने बैठक कर जब सफाई व स्वास्थ्य सेवाएं शुक्रवार से पूरी तरह बाधित करने का एलान कर दिया और शुक्रवार सुबह उसका असर भी प्रशासन को दिख गया तब प्रशासन जागा। कमिश्नर को खुद इसका संज्ञान लेकर इस मुद्दे के समाधान के लिए 28 जनवरी को बोर्ड की बैठक बुलाने के लिए पत्र भेजना पड़ा। नगर मजिस्ट्रेट को आंदोलनकारियों के बीच भेज कर उनकी समस्या समाधान का आश्वासन भी देना पड़ा। तब कर्मचारी माने।