पांच दिनों तक औसतन एक समान मौसम रहने के बाद रविवार को अचानक 4 डिग्री सेल्सियस पारा लुढ़क गया। पूरा शहर कोहरे की चादर में सिमट गया। ऐसे में लोगों की कंपकंपी छूट गई। बच्चों और बुजुर्गों को खासकर परेशानी झेलनी पड़ी। दृश्यता कम होने से सुबह के समय लोगों को वाहनों के लाइट जलानी पड़ी।
रविवार सुबह से रात तक कोहरा छाया रहा। सुबह से शाम तक दृश्यता बीस से पैंतीस मीटर के बीच रही। दोपहर को हल्की धूप निकली लेकिन बेअसर रही। कोहरे से ढका सूरज चांद की तरह नजर आया। रविवार को न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रहा।
दिसंबर माह के सामान्य तापमान से अधिकतम तापमान में 4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में कोहरे और ठंड से जीवन अस्त-व्यस्त रहा। पिछले पांच दिनों से अधिकतम तापमान 22 डिग्री से 25 डिग्री तक रहा। लेकिन रविवार को अचानक कोहरे के साथ यह 17 डिग्री पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञ दिसंबर माह का सामान्य अधिकतम तापमान 22 और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस मानते हैं। ऐसे में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.8 डिग्री अधिक रहा।
पांच दिनों में अचानक 8.8 डिग्री गिरा पारा
19 दिसंबर को अधिकतम तापमान 22.5
20 दिसंबर को अधिकतम तापमान 22.7
21 दिसंबर को अधिकतम तापमान 25.8
22 दिसंबर को अधिकतम तापमान 24.2
23 दिसंबर को अधिकतम तापमान 24.7
24 दिसंबर को अधिकतम तापमान 17.0
ठंड से अज्ञात व्यक्ति की हालत गंभीर
नगर निगम ठंड में रैन बसेरा और अलाव की तैयारियों को लेकर बड़े-बडे़ दावे करता रहा है। लेकिन जरूरतमंद लोग इस ठंड में भी खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। रविवार को सिविल लाइंस स्थिति पुलिस चौकी रेल के कांस्टेबल संजय सिंह एक अज्ञात व्यक्ति लगभग 50 वर्षीय को तेज बुखार होने पर जिला अस्पताल लेकर आए।
मरीज बोलने की स्थिति में नहीं था। कांस्टेबल ने बताया कि रविवार दोपहर को रेलवे स्टेडियम के पास एक व्यक्ति लेटा हुआ था और ठंड से कांप रहा था। उन्होंने आसपास के लोगों से पूछा तो लोगों ने बताया कि वह दो-तीन दिनों से ठंड में बाहर ही सो रहा है।
कांस्टेबल ने देखा की व्यक्ति की हालत गंभीर है तो उन्होंने एंबुलेंस बुलाया और उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। डाक्टरों ने उसे यहां के रैन बसेरा में भर्ती किया है। वहीं शहर में नगर निगम के 7 स्थाई रैन बसेरा हैं और नगर निगम प्रत्येक साल सार्वजनिक स्थानों पर अस्थाई रैन बसेरा बनाता है लेकिन इस साल अभी तक अस्थाई रैन बसेरा नहीं बनाया है।
वहीं रेलवे कालोनी स्थित मनोकामना मंदिर के पास ठंड में बैठे लोगों ने बताया कि कड़ाके की ठंड में भी वह खुले आसमान के नीचे दिन रात रहने को मजबूर हैं। जबकि निगम रेलवे स्टेशन पर अस्थाई रैन बसेरा बताना रहा है।