चंदौसी। बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में बच्चे पढ़ने के साथ वह उस व्यवस्था से भी लड़ रहे हैं, जहां हर वक्त उनके सिर पर खतरा मंडराता रहता है। किसी- किसी विद्यालय की छत से प्लास्टर गिर रहा है तो कहीं। स्कूल में बच्चे टाट व दरी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। किसी स्कूल परिसर में घास इतनी ऊंची हो गई है कि अभिभावकों को भी सांप-बिच्छू जैसे जीवों के बच्चों को काटने का डर सता रहा है। वहीं, इस संबंध में ब्लॉक के शिक्षा अधिकारी उच्चाधिकारियों के पाले में गेंद डालकर पल्ला झाड़ देते हैं।
सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने के दावों के बीच जिले के परिषदीय विद्यालयों की स्थिति बेहद खराब है। जर्जर हो चुके विद्यालय के कक्षों से बच्चों की जान को खतरा है। इन विद्यालयों का ध्वस्तीकरण और नवनिर्माण का प्रस्ताव सरकारी फाइलों में सिमट कर रह गया है। ब्लॉक बनियाखेड़ा के गांव पचाक के कंपोजिट विद्यालय में करीब 114 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इनकी जिम्मेदारी छह शिक्षकों पर है। इस विद्यालय के कक्षों की स्थिति बेहद खराब है। कक्षों की छत से जगह-जगह प्लास्टर छूट कर नीचे गिर रहा है।
वहींं, बरसात के मौसम में छत से पानी टपक कर गिरता है। फर्नीचर की व्यवस्था न होने पर बच्चे टाट व दरी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इन बच्चों के अभिभावकों को आए दिन हादसे का डर सताता रहता है। इंचार्ज अध्यापक जरीफ खान ने बताया कि विद्यालय की स्थिति के बारे में ग्राम प्रधान को अवगत करा दिया है।
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ढकनगला के स्कूल परिसर में उगी ऊंची घास, फैली गंदगी
गांव ढकनगला के प्राथमिक विद्यालय में गंदगी का अंबार लगा पड़ा है। विद्यालय के परिसर में ऊंची-ऊंची घास हो रही है। जहां बच्चे खेलते हैं और सुबह के समय प्रार्थना करते हैं। अभिभावकों का कहना है कि बरसात का मौसम चल रहा है। सांप बिच्छू के आने का खतरा बना रहता है। लेकिन स्कूल के जिम्मेदार अनजान बने हुए हैं। जबकि कई बार अभिभावक भी घास को कटवाने की मांग कर चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारी भी इन स्कूलों के निरीक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर चले जाते हैं। नतीजा यही होता है विद्यालय की स्थिति नहीं सुधरती। यही कारण है कि परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होती जा रही है।
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गिर रहा लिंटर का प्लास्टर, ऊंची घास से भी खतरा
नरौली के गांव खेड़ा खास स्थित प्राथमिक विद्यालय में नौनिहाल जर्जर भवनों के नीचे बैठक अपना भविष्य संवारने को मजबूर हैं। यहां करीब 58 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। विद्यालय के कक्षों की छत से जगह-जगह प्लास्टर छूटकर नीचे गिर रहा है। वहीं, स्कूल के परिसर में गंदगी का अंबार लगा पड़ा है। ऊंची-ऊंची घास को कटवाया तक नहीं गया है जबकि बरसात का मौसम चल रहा है। आए दिन क्षेत्र में सांप के काटने की घटनाएं हो रही हैं।
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यहां टाट पर बैठ कर पढ़ाई करते हैं बच्चे
चंदौसी के सरोजनी नायडू कंपोजिट विद्यालय में आपरेशन कायाकल्प के तहत भी बच्चों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही। यहां फर्नीचर न होने से गर्मी हो या सर्दी बच्चे जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई करते हैं। बारिश का मौसम चल रहा है। अगले तीन माह बाद ठंड का मौसम शुरू हो जाएगा। लेकिन इस स्कूल में बच्चों को बैठने के लिए फर्नीचर के इंतजाम नहीं हैं। ठंड में बच्चे जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई करने को मजबूर होंगे। विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. दुर्गा टंडन ने बताया कि आपरेशन कायाकल्प के तहत बच्चों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था की जाएगी।
बोले जिम्मेदार
इस संदर्भ में जब एबीएसए विनोद कुमार से दूरभाष पर बात हुई तो उनका था कि किसी प्रकार की कोई जानकारी देने के लिए उन्हें अनुमति नहीं हैं। जिला मुख्यालय ही जानकारी मिल सकेगी।