मुरादाबाद। चार दिवसीय छठ महापर्व का नहाय खाय के साथ शनिवार से आगाज होने जा रहा है। चार दिन तक चलने वाले लोक आस्था के इस महापर्व में बिहार की संस्कृति की झलक दिखेगी। इसको लेकर शहर में तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।रामगंगा विहार, बुद्धि विहार, हरथला कॉलोनी और लाइनपार क्षेत्र में घाट बनाने का काम शुरू हो गया है। पारंपरिक तरीके से छठ घाटों पर सूर्य भगवान की आराधना की जाएगी। वहीं, बाजार में भी व्रत के सामान की दुकानें सज गई हैं। पूर्वांचलजन कल्याण संस्था की ओर से आदर्शनगर, बुद्धि विहार, आरपीएफ मैदान और प्राचीन शिव मंदिर में छठ महापर्व मनाया जाएगा। संस्था के महासचिव अमित कुमार दुबे ने बताया कि पार्कों में लोगों ने घाट व पूजा स्थल के आसपास की सफाई कर स्थान को सजा दिया है। बृहस्पतिवार को भाईदूज होने की वजह सफाईकर्मी नहीं पहुंच सके। कई स्थानों पर लोगों ने खुद ही श्रमदान कर सफाई की। शुक्रवार की सुबह नगर निगम का दस्ता घाट व पार्कों पर सफाई का काम करेगा। छठ घाट की तैयारी के लिए संस्था की ओर से जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है।
आदर्शनगर की छठ पूजा सेवा समिति ने घाट की खोदाई व साफ-सफाई की जिम्मेदारी डीबी सिंह और अमित सिंह को सौंपी गई है। वहीं बुद्धि विहार में स्थित छठी मइया पार्क में व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भूपेश सिंह व अमन ठाकुर को दी गई है। मंडी समिति व बाजार गंज में दुकानें सज गई हैं। बाजार में बांस की टोकरी, सूप, अनन्नास, शरीफा, नारियल, गलगल, गन्ना, चने की दाल, लौकी, गुड़ और मूली आदि खरीदे जा रहे हैं।
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इस तरह मनाया जाएगा छठ महापर्व
25 अक्तूबर : महापर्व का आगाज नहाय खाय के साथ होगा। इस दिन गंगाजल युक्त पानी से व्रती महिलाएं स्नान करेंगी छठी मइया का पूजन करेंगी। व्रत रखने वाली महिलाएं नया अरवा चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी के साथ मूली का भोजन करेंगी। शाम को शुद्ध आटे की रोटी, चने की दाल और लौकी की सब्जी का सेवन किया जाएगा। इसके अलावा परिजनों को प्रसाद वितरित किया जाएगा।
26 अक्तूबर : महापर्व के दूसरे दिन खरना होगा। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जल व्रत रखेंगी और शाम को शुद्ध आटे की रोटी, साठी के चावल, गाय के दूध से खीर बनाकर नए गुड़ के साथ घर पर छठी मइया को नमन कर भोग लगाएंगी। इसी के साथ भोजन में नमक का इस्तेमाल करना भी बंद कर दिया जाएगा। इस प्रसाद को भी पूरे परिवार को वितरित किया जाएगा। शाम से ही 36 घंटे का महिलाओं का निर्जल उपवास शुरू हो जाएगा।
27 अक्तूबर : व्रत रखने वाली महिलाएं इस महापर्व के तीसरे दिन नहाने के बाद नए वस्त्र धारण करेंगी। इसके बाद शुद्ध आटे के ठेकुआ, गुड़ व चीनी के साथ साथ देसी घी में खजूर बनाएंगी। महिलाएं नदी या तालाब में खड़ी होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी।
28 अक्तूबर : व्रती महिलाएं सुबह उगते हुए सूर्य को जल चढ़ाएंगी। इसके बाद व्रती महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर कौंछ भरेंगी और आपस में गले मिलेंगी। बुजुर्गों के चरण छूकर आशीर्वाद लेंगी। इसके बाद प्रसाद का सेवन कर व्रत पूर्ण करेंगी।