रामपुर। बहुचर्चित अधिवक्ता फारुख खां हत्याकांड में पुलिस की जांच पूरी हो गई है। पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर जिला पंचायत में तैनात बाबू असगर अली के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। वहीं, इस मामले में नामजद जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी नीरज रस्तोगी को फिलहाल राहत मिली है, क्योंकि उनका नाम चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि उनकी भूमिका की जांच अभी समाप्त नहीं हुई है और यदि कोई ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो आगे कार्रवाई की जाएगी।
फारुख खां रामपुर कचहरी में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत थे। उनकी पत्नी जिला पंचायत कार्यालय में तैनात हैं। अधिवक्ता की हत्या की वारदात 11 फरवरी को जिला पंचायत परिसर में हुई थी, जिससे पूरे जिले में सनसनी फैल गई थी। दिनदहाड़े हुई घटना के बाद जिला पंचायत कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई थी और कर्मचारियों में दहशत का माहौल बन गया था। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंच गया था। वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कराई थी।
इस मामले में सिविल लाइंस थाने में बाबू असगर अली और अपर मुख्य अधिकारी नीरज रस्तोगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। चूंकि मामला अधिवक्ता की हत्या से जुड़ा था, इसलिए अधिवक्ताओं में भी भारी आक्रोश देखा गया था। वकीलों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था।
पुलिस ने घटना के बाद कई लोगों से पूछताछ की, सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्य जुटाए। लंबे समय तक चली जांच के बाद पुलिस ने बाबू असगर अली के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने का दावा करते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। वहीं, अपर मुख्य अधिकारी नीरज रस्तोगी की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि आगे कोई प्रमाण मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी वारदात
रामपुर। अधिवक्ता की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस को सीसीटीवी फुटेज मिली थी, जिसमें अधिवक्ता और जिला पंचायत के बाबू के बीच झड़प दिखाई दी थी। फुटेज में गोली चलने की घटना भी कैद हुई थी, जिसमें अधिवक्ता की मौत हो गई थी। एक अन्य फुटेज में जिला पंचायत के बाबू द्वारा अधिवक्ता की पत्नी पर पिस्टल की बट से हमला करते हुए दिखाया गया था।
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एएमए को हाईकोर्ट से मिली थी राहत
रामपुर। अधिवक्ता हत्याकांड में जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी नीरज रस्तोगी को नामजद किया गया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी, जहां से उन्हें राहत मिल गई थी।
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हत्याकांड के बाद गर्माया था माहौल
रामपुर। अधिवक्ता हत्याकांड के बाद जिले ही नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकीलों में भी आक्रोश फैल गया था। वकीलों ने रामपुर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किए थे और कई बार डीएम व एसपी का घेराव भी किया था।
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वकीलों की मांग पर हटाए गए थे इंस्पेक्टर
रामपुर। वकीलों ने इस मामले में तत्कालीन सिविल लाइंस थाना प्रभारी संजीव कुमार को हटाने की मांग की थी। इसे लेकर कई दिनों तक प्रदर्शन चला था। बाद में एसपी ने थाना प्रभारी संजीव कुमार को हटा दिया था।
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अधिवक्ता हत्याकांड में जिला पंचायत के बाबू असगर अली के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। इस मामले में दूसरे आरोपी जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी नीरज रस्तोगी की भूमिका की जांच अभी जारी है। -जितेंद्र सिंह, सीओ सिटी