सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करना अवैधानिक है।लेकिन आफताब हुसैन और मेहताब हुसैन ने इस जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। उनका नाम 1410-1415 फसली वर्ष में खतौनी में श्रेणी चार के रूप में दर्ज हुआ था।
तहसीलदार संभल ने 27 जनवरी 2003 को उनके नाम खारिज कर दिए थे। भूमि को पुनः ग्राम समाज में दर्ज कर दिया गया था। इसके बावजूद, भू-माफिया प्रवृत्ति के इन व्यक्तियों ने बेशकीमती गाटे पर कब्जा बनाए रखा। यह गाटा संभल-चन्दौसी मुख्यमार्ग से जुड़ा है।
वक्फ बोर्ड में गलत पंजीकरण
लेखपाल का कहना है कि कब्जाधारकों ने अपना कब्जा बनाए रखने के लिए गलत तथ्य प्रस्तुत किए। उन्होंने वक्फ बोर्ड के समक्ष प्रार्थना पत्र दिया। इसमें यह नहीं बताया गया कि यह सार्वजनिक संपत्ति है। उन्होंने केवल गाटे की चौहद्दी लिखकर वक्फ में पंजीकरण करा लिया। इसके चलते यह वक्फ संपत्ति में जमीन दर्ज हो गई और इस पर वर्षों तक कब्जा बनाए रखा है।