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भूपेंद्र सिंह, एसटी हसन के गांव आरक्षण से मुक्त

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मुरादाबाद। प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह और सपा सांसद डा. एसटी हसन के पैतृक गांव को आरक्षण से मुक्त रखा गया है। जबकि अन्य कई विधायकों की पैतृक ग्राम पंचायत आरक्षण के जद में आ गई हैं। इस नई आरक्षण व्यवस्था से कुछ जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपने पसंदीदा व्यक्ति को गांव का मुखिया बनाने में दिक्कत आ सकती है।
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चौधरी भूपेंद्र सिंह प्रदेश सरकार में पंचायतीराज मंत्री हैं। वह मूलरूप से छजलैट ब्लाक के ग्राम महेंद्री सिकंदरपुर के रहने वाले हैं। वह पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते हैं। वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में उनकी ग्राम पंचायत पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित थी। इस बार उनकी ग्राम पंचायत अनारक्षित घोषित कर दी गई है। ऐसे में उनकी ग्राम पंचायत से अब किसी भी जाति का ग्रामीण चुनाव लड़ सकेगा।
कुंदरकी विधायक हाजी रिजवान मूलरूप से गांव डोमघर के रहने वाले हैं। वर्ष 2015 में उनकी ग्राम पंचायत अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। इस बार यह ग्राम पंचायत पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित कर दी गई है। बिलारी विधायक मोहम्मद फहीम मोहम्मद इब्राहिमपुर ग्राम पंचायत के मूल रूप से रहने वाले हैं। पहले उनकी यह ग्राम पंचायत संभल जिले के आंशिक ब्लाक बनियाखेड़ा में थी। जो अब बिलारी ब्लाक में आ गई है। वर्ष 2015 में उनकी ग्राम पंचायत पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित थी, जबकि इस बार यह ग्राम पंचायत अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है। इसी तरह कांठ विधायक राजेश कुमार चुन्नू शेरपुर एहतमादपुर ग्राम पंचायत के रहने वाले हैं। वर्ष 2015 में उनकी ग्राम पंचायत अनारक्षित थी जो इस बार अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो गई है। सपा सांसद डा. एसटी हसन मूल रूप से भगतपुर टांडा ब्लाक के ग्राम पंचायत सिरसवां गोड़ के रहने वाले हैं। वर्ष 2015 में इनकी ग्राम पंचायत महिला के लिए आरक्षित थी। इस बार उनकी ग्राम अनारक्षित रखी गई है।
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