मुरादाबाद। सीए श्वेताभ तिवारी हत्याकांड की तफ्तीश में जुटी पुलिस प्रॉपर्टी, पैसा और संबंधों के एंगल पर जांच पड़ताल करने में जुटी है। दस टीमों को अलग-अलग लक्ष्य दिया गया है।
पुलिस इस मामले की तह तक जाने में जुटी है। उनकी सभी प्रॉपर्टी, उन्होंने किन लोगों को रुपये दिए और किन लोगों से रुपये लिए इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। इसके अलावा उनके संबंधों के बारे में भी पता लगाया जा रहा है।
सिविल लाइंस के साईं गार्डन निवासी सीए श्वेताभ तिवारी का दिल्ली रोड स्थित बंसल कॉम्प्लेक्स में श्वेताभ एंड एसोसिएट नाम से दफ्तर है। इस कंपनी में उनके अलावा चार और पार्टनर शामिल थे, जिसमें संजीव बंसल की दफ्तर में ही हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी। अब श्वेताभ तिवारी, अखिल अग्रवाल और आलोक रस्तोगी कंपनी ऑपरेट कर रहे थे।
बुधवार की शाम को आलोक रस्तोगी चले गए थे, जबकि अखिल के साथ वह घर लौटने वाले थे। दफ्तर से निकलने के बाद दोनों श्वेताभ की क्रेटा कार में बैठ गए थे। यहां दोनों बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान फोन आने पर वह बातचीत करने के लिए कार से उतर गए थे।
अखिल अपने बेटे से फोन पर बात करने लगे थे। काफी देर तक श्वेताभ वापस नहीं आए तो अखिल ने कॉल की, लेकिन नंबर व्यस्त था। कुछ देर बाद दोबारा कॉल की तो कॉल रिसीव नहीं हुई। तब तक गार्ड नीरज तिवारी भी आ गया। तब तक बाइक सवार हमलावर श्वेताभ पर गोलियां बरसाने के बाद बाइक से बुिद्ध विहार की ओर भाग निकले थे। इस मामले में एसएसपी ने दस टीमें लगाई हंै।
पुलिस की अब तक जांच पड़ताल में सामने आया है कि सीए ने प्रॉपर्टी का धंधा भी शुरू कर दिया था। वह उत्तराखंड के भवाली में रिसोर्ट्स और आवासीय कॉलोनी बनवा रहे थे। उत्तराखंड के अलावा दिल्ली रोड पर भी उनका रेस्टोरेंट बन रहा है।
पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई कि उन्होंने कुछ लोगों को पैसे भी उधार दिए थे। इन सभी पहलुओं के साथ ही पुलिस उनके संबंधों के बारे में भी जानकारियां जुटा रही है।