सोनकपुर बाईपास जल्द शुरू होने की आस फिर टूटती नजर आ रही है। डीएम के निरीक्षण के बाद जल्द इस बाईपास के शुरू होने की उम्मीद जगी थी। लेकिन मामला शासन को डीएम की चिट्ठी जाने तक ही सिमटकर रह गया। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की वजह से सात साल पहले बना यह बाईपास बनने के बाद से ही बंद पड़ा है।
अब डीएम ने नए सिरे से पहल की लेकिन स्थानीय सांसद और विधायक के सुस्त रुख ने प्रोजेक्ट को फिर ठंडे बस्ते में पहुंचा दिया है। दिल्ली हाईवे को सर्किट हाउस के पास से हरिद्वार हाईवे को अकबर किले पर कनेक्ट करने वाला सोनकपुर बाईपास करीब सात साल पहले एमडीए ने बनाया था।
लेकिन सोनकपुर में महज 200 मीटर के फासले पर दो रेलवे लाइन बीच में आने की वजह से यह बाईपास आज तक शुरू नहीं हो सका है। पहले रेलवे इन दोनों लाइनों पर क्रासिंग देने को तैयार हो गया था लेकिन फिर रेलवे अफसरों ने इससे इंकार कर दिया। इसके बाद तीन साल पहले ब्रिज कार्पोरेशन ने यहां फोर लेन वाले डेढ़ किमी लंबे आरओबी की डिजाइन तैयार की।
लेकिन प्रोजेक्ट की लागत 115 करोड़ बैठी, जिसे प्रदेश सरकार ने देने में हाथ खड़े कर दिए। यह प्रोजेक्ट तीन साल से यूं ही ठंडे बस्ते में पड़ा था। लेकिन पिछले महीने जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने फिर से इसकी फाइल पलटी और निरीक्षण करने मौके पर पहुंच गए।
डीएम ने निरीक्षण के बाद शासन और रेलवे हेड क्वार्टर को लिखा कि जब तक आरओबी नहीं बनता तब तक दोनों रेल लाइनों पर फाटक लगाकर यहां रास्ता दे दिया जाए। ताकि सोनकपुर बाईपास को शुरू किया जा सके। मुद्दा इतना उलझा हुआ भी नहीं है क्योंकि सोनकपुर से महज 300 मीटर दूर आदर्श कालोनी में क्रासिंग बने हैं।
रेलवे इन दोनों क्रासिंग को बंद करके इन्हें सोनकपुर में शिफ्ट कर सकता है, लेकिन जरूरत रेल मंत्रालय में पैरवी की है। यूं तो स्थानीय सांसद सत्ताधारी दल के हैं लेकिन उनकी ओर से भी इसे लेकर कोई गंभीर कोशिश नहीं की गई।