मुरादाबाद। दिल्ली रोड की बेशकीमती जमीनों पर कब्जा जमाने के लिए कुछ बिल्डरों व कारोबारियों ने चकबंदी में हेराफेरी कराई थी। इसमें 120 एकड़ जमीन की ग्राम सभा बदल दी गई। सरकारी जमीन से लेकर नदी के रकबे पर भी कब्जा हो गया। अब प्रशासन की जांच में यह खेल खुल रहा है। बिल्डरों, कारोबारियों के अलावा तत्कालीन विभागीय अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
प्रशासन पहले इस जमीन को दस्तावेजों में सरकारी बनाने पर ध्यान दे रहा है। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। साथ ही इन जमीनों पर पास सभी नक्शों को एमडीए ने होल्ड कर दिया है। प्रशासन ने बिल्डरों व कारोबारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन जांच की जा रही है कि जिले में किन-किन स्थानों पर सरकारी जमीनों पर कब्जा है।
2004 की चकबंदी में लाकड़ी फाजलपुर की 120 एकड़ जमीन गलत तरीके से मनोहरपुर में दर्शा दी गई। रिकॉर्ड रूम से मानचित्र गायब पाए गए। वर्तमान में इन जमीनों पर बिल्डरों के कई प्रोजेक्ट शुरू हो रहे हैं। जांच के बाद जिला प्रशासन ने 120 एकड़ जमीन की खरीद व बिक्री पर रोक लगा दी है।
एसडीएम सदर डॉ. राम मोहन ने बताया कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि पर कब्जे किए गए हैं। इसमें गागन नदी का रकबा भी शामिल है। वहीं डीएम ने कार्रवाई करते हुए नक्शे होल्ड कराने के अलावा जमीन को सरकारी भूमि में शामिल करने की कवायद शुरू कर दी है। साथ ही यह भी कहा है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। यानी अभी कई और तथ्य सामने आ सकते हैं। डीएम ने मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को निर्देश दिए हैं कि जांच पूरी होने तक इस क्षेत्र में कोई भी नया नक्शा पास न किया जाए। जिला प्रशासन अब तक कुल 213 गाटा संख्याओं की खरीद व बिक्री पर रोक लगा चुका है। इन सभी गाटा संख्याओं को मिलाकर करीब 73.17 हेक्टेयर भूमि सरकारी है। इसमें लाकड़ी फाजलपुर गांव के 96 व मनोहरपुर गांव के 117 गाटे शामिल हैं। इनमें नदी, भूमिधरी, श्रेणी-1 क, रेत, श्रेणी 6-2, श्रेणी 5-1 और बंजर सरकारी भूमि शामिल हैं।
अब तक की जांच में मनोहरपुर व लाकड़ी फाजलपुर गांव में दर्ज 120 एकड़ भूमि सरकारी पाई गई है, जिन पर अवैध कब्जा था। 2004 की चकबंदी के दौरान यह गड़बड़ी हुई है। तत्कालीन जिम्मेदार अभी सेवा में हैं। मामले की पूरी जांच की जा रही है। - अनुज सिंह, डीएम मुरादाबाद