कैसे नहीं लोगे पांच सौ और हजार की नोट। खुले पैसे नहीं हैं...यही है। जल्दी वापस करो बकाया पैसे...मुझे उतरना है। आजकल रोडवेज बसों में कंडक्टरों को यात्रियों के इन्हीं सवालों से दो चार होना पड़ रहा है। यात्रियों की इस किचकिच और बहसबाजी से बचने के लिए करीब पचीस फीसदी परिचालक छुट्टी पर चले गए हैं। इससे मुरादाबाद और पीतलनगरी डिपो की करीब तीस-तीस बसें वर्कशाप में खड़ी हो गई हैं।
हजार और पांच सौ नोट पर पाबंदी लगने से नौ नवंबर से रोडवेज के सफर मेें यात्रियों और परिचालकों में पैसे को लेकर बहसबाजी चल रही है। सफर में कंडक्टर बड़े नोट ले लेते हैं लेकिन यात्रियों को बकाया पैसा देने के लिए उनके पास खुले पैसा नहीं होते हैं। जिसे लेकर रोडवेज की हर बस में नोकझोेेंक हो रही है। इससे आजिज रोडवेज परिचालक छुट्टी पर चले जाना मुनासिब समझ रहे हैं। इससे वर्कशाप में बसों की संख्या बढ़ गई है। रविवार को मुरादाबाद और पीतलनगरी डिपो की तीस-तीस बसें रूट पर नहीं निकली। इससे यात्रियों को परेशानी हो रही है।
कल से और बढ़ सकती है परेशानी
मुरादाबाद। आरएम अतुल जैन का कहना है कि सोमवार तक रोडवेज की बसों में हजार और पांच सौ के नोट लिए जाएंगे। अगर सोमवार को कोई नया फरमान नहीं आया तो रात बारह बजे के बाद बड़े नोट नहीं लिए जाएंगे। इससे परेशानी और बढ़ सकती है।