एकाध को छोड़ शहर में बने तमाम मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट बिल्डरों ने बगैर कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बेच दिए डाले। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रैरा) आने के बाद अब बिल्डरों में खलबली मची है। एक्शन के डर से बिल्डरों ने रातोंरात कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए प्राधिकरण में आवेदन किए हैं।
कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने के लिए बिल्डरों को अपार्टमेंट में मानक के मुताबिक सभी सुविधाएं देनी होती हैं। ऐसे में सुविधाओं में कटौती कर रहे बिल्डरों ने बगैर कंप्लीशन के ही अपार्टमेंट बेच डाले। पूरे खेल में प्राधिकरण के अफसर और इंजीनियर शामिल हैं।
दिल्ली रोड और कांठ रोड पर मिलाकर शहर में 12 से अधिक मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट्स हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश के पास कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं है। नियमानुसार किसी भी अपार्टमेंट को बिल्डर तभी बेच सकता है जब वह प्राधिकरण से कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल कर ले।
एमडीए किसी अपार्टमेंट को तभी कंप्लीशन सर्टिफिकेट दे सकता है जब उसमें निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप किया गया हो, मानक के मुताबिक इन साइड और आउट साइड सुविधाएं पूरी हों, ओपन एरिया, पार्क, कम्युनिटी सेंटर, सिक्योरिटी, पार्किंग आदि सभी सुविधाएं नियमों के मुताबिक ठीक हों।
नियमों पर गौर करें तो किसी भी मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट को कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने से पहले नहीं बेचा जा सकता। लेकिन बिल्डर कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने से कतराते हैं क्योकि इसके लिए उन्हें मानक के मुताबिक सुविधाएं देनी पड़ेंगी। कई अपार्टमेंट में स्वीकृत संख्या से अधिक फ्लैट बना लिए गए हैं।
कई में तो फ्लोर ही बढ़ा दी गई हैं। ऐसे में बिल्डर कंप्लीशन के झंझट में पड़ना नहीं चाहते। लेकिन अब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी के वजूद में आने के बाद बिल्डरों में हड़कंप मचा है। रातोंरात कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए प्राधिकरण में जोड़तोड़ शुरू हो गई है। लेकिन सरकार सख्त है लिहाजा प्राधिकरण अफसर भी बिना मानकों के कंप्लीशन देकर अपनी कलम फंसाने से बच रहे हैं।