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Moradabad News: ड्रोन से नहीं दिखे ईंट-पत्थर, गुस्से को भी नहीं समझ सके अफसर

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मुरादाबाद। संभल में जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर अंदर ही अंदर चल रहे विरोध को पुलिस-प्रशासन समझ नहीं पाया। इसी का नतीजा है कि विरोध बवाल में बदल गया। पुलिस ने न तो सोशल मीडिया पर चल रहे नेताओं के भड़काऊ बयानों को गंभीरता से लिया और न ही पुलिस के ड्रोन की निगरानी छिपे ईंट-पत्थरों को ढूंढ सकी। इस मामले में खुफिया तंत्र भी पूरी तरह से फेल साबित हुआ।
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संभल स्थित जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताते हुए हिंदू पक्ष ने 19 नवंबर को कोर्ट में वाद दायर हुआ। उसी दिन कोर्ट ने कमीशन गठित किया और जामा मस्जिद का सर्वे करा दिया गया। तभी से विरोध की चिंगारी उठने लगी थी। इस चिंगारी को संभल का पुलिस-प्रशासन भांपने में पूरी तरह से फेल रहा।
22 नवंबर को जुमे की नमाज पढ़ने गए लोगों को वापस लौटा दिया गया था। इसके बाद नेताओं के बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने शुरू हो गए, लेकिन पुलिस प्रशासन ने इन बयानों को गंभीरता से नहीं लिया। यह बयान संभल में सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। पुलिस ने जामा मस्जिद के आसपास के मोहल्लों में ड्रोन तो कई दिन तक उड़ाया, लेकिन ड्रोन की निगरानी भी ईंट पत्थरों को नहीं ढूंढ पाई।
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रविवार सुबह सर्वे टीम जैसे ही मस्जिद पहुंची, कुछ ही देर में हजारों की संख्या में लोग जुट गए। महिलाएं छतों पर पहुंच गईं, लेकिन इसकी जानकारी न तो अफसरों के पास थी और न ही खुफिया तंत्र के पास। लोगों की छतों पर ईंट-पत्थर रखे थे, लेकिन पुलिस केवल ड्रोन उड़ाकर अपनी ड्यूटी पूरी करती रही। रविवार सुबह जब बवाल हुआ तो छतों से भी खूब पत्थर बरसाए गए। अगर पुलिस प्रशासन से पहले दिन से ही इस मामले को गंभीरता से लिया होता तो शायद इस तरह का बवाल नहीं होता।


संभल में पुलिस प्रशासन पहले ही दिन से अलर्ट था। सर्वे टीम मस्जिद में पुलिस टीम के साथ ही पहुंची थी, लेकिन कुछ लोगों के उकसाने पर अचानक भीड़ इकट्ठा हो गई। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की लोगों ने पथराव कर दिया।
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मुनिराज जी, डीआईजी
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