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कोरोना की तेज रफ्तार से बढ़ा सांसों का संकट

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मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार से सांसों पर संकट भी बढ़ रहा है। अस्पतालों में बेड कम पड़ रहे हैं। ऑक्सीजन के लिए आपाधापी मची है। लोग ऑक्सीजन के सिलिंडर उठाए रीफिलिंग सेंटरों पर भटक रहे हैं । निजी अस्पताल भी ऑक्सीजन न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। वहीं, शहर के एक रीफिलिंग सेंटर पर शनिवार दोपहर को ऑक्सीजन गैस ही खत्म हो गई। इमरजेंसी स्टॉक भी प्रयोग करना पड़ा। एक अन्य सेंटर पर आठ टन गैस इमरजेंसी में मंगाई गई। हालांकि, ड्रग्स विभाग के अधिकारियों ने शाम को सभी सेंटरों पर ऑक्सीजन सप्लाई पहुंचने का दावा किया है।
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जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। 22 अप्रैल को 486 पॉजिटिव केस आए थे और कुल 4707 सक्रिय केस थे। शुक्रवार को रिकार्ड तोड़ 1752 केस आए और पॉजिटिव के सों की संख्या 6135 तक पहुंच गई। शनिवार को यह आंकड़ा 6485 तक पहुंच गया। ऐसे में कोविड अस्पतालों के बेड भी लगातार भरते जा रहे हैं। आईसीयू के अधिकांश बेड फुल हैं। वहीं, अधिकांश मरीजों को ऑक्सीजन लेवल कम होने की शिकायत है। शुक्रवार को 519 मरीज को ऑक्सीजन दी जा रही थी, जबकि 41 वेंटिलेटर पर थे।
ऐसे में ऑक्सीजन की मांग चार से पांच गुना तक बढ़ गई है। इसे देख प्रशासन ने ऑक्सीजन सप्लायरों को केवल मेडिकल आपूर्ति की हिदायत दी है। कोविड अस्पताल टीएमयू के नोडल अधिकारी वीके सिंह ने बताया कि मरीजों के बढ़ने के साथ ही ऑक्सीजन की मांग बढ़ी है। जिले के अस्पतालों को ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली दो यूनिटों का दो दिन का बैकअप भी प्रयोग होने लगा है। शनिवार को शहर स्थित यूनिट में दोपहर को ऑक्सीजन ही खत्म हो गई है। फाजलपुर लाकड़ी स्थित यूनिट में भी बैकअप कोटे से ऑक्सीजन अस्पतालों में भेजी है। जब भी पूर्ति नहीं हो सकी तो प्रदेश स्तर पर आपूर्ति करने वाली कलिंगा फर्म से आठ टन ऑक्सीजन भेजी गई। कलिंगा यूनिट के संचालक अमित मोदी के अनुसार उनकी यूनिट प्रदेश सरकार द्वारा जारी कोटे के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में सप्लाई भेजती है। आठ टन ऑक्सीजन शहर की एक यूनिट को दी।
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बाइक पर सिलिंडर उठाकर घूमते रहे लोग
अस्पतालों में बेड नहीं हैं। मजबूरन लोग संक्रमित मरीज को घर में ही ऑक्सीजन देने के इंतजाम कर रहे हैं। सिलिंडर खरीदकरऑक्सीजन भरवाते हैं, लेकिन ऑक्सीजन खत्म होते ही उसे भरवाने को बाइक, स्कूटर पर रीफिलिंग यूनिटों पर चक्कर काटते हैं।
मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से ऑक्सीजन की खपत लगातार बढ़ रही है। जिले में करीब दो दिन का 40 टन ऑक्सीजन होनी चाहिए ,लेकिन ये संभव नहीं हो पा रहा है यूनिटों में ऑक्सीजन टैंकर आते ही सिलिंडर रीफिलिंग कर अस्पतालों में भेजे जा रहे हैं। शनिवार को एक यूनिट में ऑक्सीजन खत्म हो गई थी। यूनिट ने इमरजेंसी केे लिए सिलिंडर भरवा कर रख लिए थे, जिन्हें अस्पतालों में भेजा गया। हालांकि शाम को दोनों यूनिटों पर ऑक्सीजन की सप्लाई उपलब्ध हो गई थी। जिले में 21 टन के आसपास ही ऑक्सीजन मिल रही है, जबकि डिमांड 25 टन है। यूनिट बैक अप कोटे से देकर पूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा किसी भी निजी प्राइवेट अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाई रोकने या आपूर्ति न करने के संबंध में कोई निर्देश यूनिट संचालकों को नहीं दिए गए हैं। मुकेश जैन, औषधि निरीक्षक
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