कहने को तो मुरादाबाद दुनियाभर में पीतल नगरी के नाम से मशहूर है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री से पीतल कमोबेश गायब ही हो चुका है। पिछले करीब डेढ़ दशक में पीतल की जगह तेजी से कांच, एल्युमीनियम और आयरन ने ले ली।
लेकिन अब फिर से इंडस्ट्री में ब्रास अपनी वापसी कर रहा है। हाल के हैंडीक्राफ्ट्स फेयर्स में गोरों ने पीतल की चमक में रुचि दिखाई है। जिसकी वजह से हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री में पीतल का इस्तेमाल 15-20 फीसदी बढ़ना तय माना जा रहा है।
मुरादाबाद की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री में पिछले कुछ वर्षों में कांच और एल्युमीनियम का चलन तेजी से बढ़ा है। कांच का चलन बढ़ने की वजह से यहां कांच की कुछ फैक्ट्रियां भी लगीं। जैसे - जैसे कांच और एल्युमीनियम का चलन बढ़ा वैसे - वैसे इंडस्ट्री से पीतल सिमटता चला गया।
नौबत यहां तक आ गई कि पीतल नगरी की पीतल इंडस्ट्री में ब्रास का इस्तेमाल सिमटकर महज 15 फीसदी तक रह गया। लेकिन इंटरनेशनल मार्केट के बदलते ट्रेंड ने फिर से इंडस्ट्री में ब्रास की वापसी कर दी है। ब्रास की वापसी की दो अहम वजह मानी जा रही हैं। एक तो कांच में चाइना मजबूत प्रतिद्वंदी है।
चाइना के कांच की क्वालिटी इंडिया से बेहतर है और उसके प्रोडक्ट सस्ते हैं। दूसरा एल्युमीनियम के आइटम में ब्रास वाली फिनिशिंग नहीं आ पाती। एल्युमीनियम के प्रोडक्ट कुछ बार इस्तेमाल होने के बाद जवाब देने लगते हैं।
खास तौर पर चूड़ी वाले आइटम में एल्युमीनियम प्रोडक्ट की चूड़ियां कुछेक बार खोलने - बंद करने पर ही फेल हो जाती हैं। तीसरी अहम वजह यह है कि ब्रास के आइटम में कांच जो चमक देता है वो एल्युमीनियम के साथ कभी नहीं दे पाता। एल्युमीनियम के प्रोडक्ट हल्के होते हैं और ब्रास वाली फीलिंग कभी नहीं दे पाते।