मुश्किल दौर से गुजर रही हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को बजट से भी राहत नहीं मिली। सरकार से सपोर्ट की उम्मीद लगाए बैठे निर्यातकों को केवल निराशा ही हाथ आई है। निर्यातकों के अनुसार बजट में एमएसएमई सेक्टर को पूरी तरह से नजरअंदाज कर किया गया। जबकि वैश्विक मंदी की आहट से एक्सपोर्ट इंडस्ट्री में पहले से ही गिरावट दर्ज की जा रह थी। सरकारी सहयोग नहीं मिलने से उद्योग पर परिणाम दूरगामी होंगे।
इकनामिक सर्वे से निर्यातक उम्मीद लगा रहे थे कि सरकार गिरावट के दौर से गुजर रही इंडस्ट्री को इंसेंटिव देगी। ग्लोब इंटरनेशनल के निर्यातक सतपाल का कहना है बजट से पूरी तरह से चुनावी बजट है। इंडस्ट्रीज को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। इंडस्ट्री के लिए बैंक ब्याज में छूट नहीं दी। कैपिटल गुड्स पर इंसेंटिव नहीं दिया। आगे के लिए भी कोई प्रावधान नहीं किया गया है। भविष्य में किसी छूट और सपोर्ट की उम्मीद भी बेमानी ही कही जाएगी।
मोदी जी ने किसानों की बदहाली दूर करने के लिए बजट दिया है, लेकिन एक्सपोर्टर्स की बदहाली शुरू हो गई है। वहीं सीएल गुप्ता एक्सपोर्ट से अजय गुप्ता का कहना है कि उम्मीद तो बहुत थी, लेकिन हाथ कुछ नहीं आया। जो कुछ जमा पूंजी थी वह भी जाती हुई दिखाई दे रही है।
इंडस्ट्री को विशेषकर मध्यम उद्योग को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। सर्विस टैक्स आधा फीसदी और बढ़ाया गया। मंदी के दौर में समस्याएं और बढ़ेंगी। बंसल इंपेक्स के शरद बंसल का कहना है कि बजट ने अरमान ही तोड़ दिए हैं। विश्व भर में मुद्राओं के अप डाउन से हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है।
सरकार से सपोर्ट की जरूरत थी पर हुआ उल्टा। एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को अपने ही बल पर खड़ा होना होगा। जेड संस के नवेद उर रहमान का कहना है कि इस बजट के परिणाम दूरगामी होंगे। बजट के अलावा एग्जिम पालिसी भी ऐसी ही रही तो एक्सपोर्ट में वृद्धि होना बहुत मुश्किल होगा। सरकार को एक्सपोर्ट पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत थी।