मुरादाबाद। बच्चे के होंठ या नाखून नीले पड़ रहे हैं, सांस फूल रही है या दूध पीने में परेशानी हो रही है तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। यह जन्मजात हृदय रोग के संकेत हो सकते हैं। समय पर जांच और उपचार से बच्चे की स्थिति को गंभीर होने से बचाने में मदद मिल सकती है। बुधवार को मुरादाबाद एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की ओर से कांठ रोड स्थित एक होटल में आयोजित सीएमई में विशेषज्ञों ने बच्चों की इन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं पर चर्चा की।
सीएमई में बाल हृदय एवं छाती सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. गौरव कुमार ने टेट्रालॉजी ऑफ फैलो (टीओएफ) के उपचार में मौजूदा बदलावों पर जानकारी दी। यह जन्मजात हृदय रोग है, जिसमें बच्चे के दिल की बनावट में चार तरह की गड़बड़ियां होती हैं। इसके कारण शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। बच्चे के होंठ और नाखून नीले पड़ना, सांस फूलना और दूध पीते समय जल्दी थक जाना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखने पर बाल रोग विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।
कार्यक्रम में बच्चों में शॉक के उपचार पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ और पीआईसीयू प्रभारी डॉ. नमीत जेरथ ने इस विषय पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शॉक की स्थिति में शरीर के अंगों तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। गंभीर संक्रमण या शरीर में पानी की अत्यधिक कमी इसकी वजह हो सकती है। बच्चा असामान्य रूप से सुस्त हो, उसकी सांस तेज चल रही हो या हाथ-पैर ठंडे पड़ रहे हों तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
तीसरे सत्र में वरिष्ठ बाल नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अनुनया कटियार ने बच्चों में पेशाब के संक्रमण की पहचान और बचाव पर जानकारी दी। बार-बार पेशाब में संक्रमण होने पर उसकी वजह का पता लगाने के लिए जांच जरूरी है। संक्रमण की पुष्टि के बाद डॉक्टर की सलाह से दवा का पूरा कोर्स करना चाहिए। बिना सलाह के एंटीबायोटिक देना नुकसानदेह हो सकता है।
एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार खट्टर, सचिव डॉ. गौरव त्यागी और कोषाध्यक्ष डॉ. विशाल रस्तोगी सहित अन्य बाल रोग विशेषज्ञ कार्यक्रम में शामिल हुए।