जिले में जाली नोटों के तस्करों का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। पिछले सात सालों में जिले में जाली करेंसी की तस्करी करने वाले सवा सौ से ज्यादा एजेंट गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें पांच मदरसा शिक्षक और दस से अधिक महिलाएं भी शामिल हैं। इन तस्करों के लिंक नेपाल और पाकिस्तान तक उजागर हो चुके हैं।
पश्चिम बंगाल से जाली करेंसी पहुंचने की बात तो अब आम हो चुकी है। ये तस्कर काले शीशी चढ़ी कारों से जाली करेंसी की तस्करी करते हैं। जिले में गांव देहात के पैठ बाजारों में जाली करेंसी को खपाने के लिए महिला एजेंटों को भी मैदान में उतारा गया है। जिनमें से कई को पुलिस गिरफ्तार क र चुकी है।
खुफिया एजेंसियां भी कई बार आगाह कर चुकी हैं कि काले शीशे लगे वाहनों से जाली करेंसी और मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही हैं। इन वाहनों के मूवमेंट का भी सटीक वक्त एजेंसियों ने पुलिस को बताया था। ये वाहन रात में ढाई तीन बजे से लेकर सुबह सात बजे तक सड़कों पर दौड़ते हैं। जिस वक्त पुलिस की सक्रियता अपेक्षाकृत कम होती है।
जिले में भोजपुर, भगतपुर, जयंतीपुर, कटघर, कुंदरकी क्षेत्रों में जाली करेंसी के कई बड़े तस्कर पकड़े जा चुुके हैं जो पश्चिम बंगाल के साथ ही नेपाल और पाकिस्तान से जाली करेंसी लाकर उसे यहां बाजारों में खपाते थे। जाली करेंसी के तस्कर काले शीशे चढ़ी कारों पर प्रेस, पुलिस लिखकर पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। दिन में भी सड़कों पर काले शीशे की तमाम कारें बेरोकटोक पुलिस की नजरों के सामने दौड़ती है।