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चेताया पर नहीं जागा निजाम, खुले नाले में गिरकर चली गई बाइक सवार की जान

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ताड़ीखाना चौराहा पर बाइक सवार की नाले में गिरने से हुई मौत नाले में गिरी बाइक। - फोटो : CITY
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मुरादाबाद। निगम के अधिकारी इस कदर संवेदना शून्य हो गए हैं कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी या उनकी सरपरस्ती में चल रहे काम में हुई लापरवाही किसी की जान ले सकती है। यही हुआ। नाला सफाई हुई तो उसके ऊपर से हटाए ढक्कन वापस नहीं लगाए। अमर उजाला ने चेताया पर नहीं चेते। सोते रहे और उनकी इस नींद ने एक युवक की जान ले ली। बाइक सवार युवक बाइक समेत इस खुले नाले में गिर गया और उसकी मौत हो गई। सवाल यह है कि सिस्टम की इस जानलेवा लापरवाही का कौन जिम्मेदार है? आनन फानन में नाले पर ढक्कन लगाकर अपनी करतूत पर तो पर्दा डालने की कोशिश की गई पर क्या इससे उस घर का चिराग दोबारा रोशन हो सकेगा।
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सिविल लाइंस के चंद्र नगर गली नंबर-3 में रमेश सैनी का परिवार रहता है। उनके बेटे दिलीप सिंह सैनी की सुपर बाजार में मोबाइल मरम्मत की दुकान है। दिलीप के परिवार में मां रूपा देवी, पत्नी सुषमा, तीन साल का बेटा लव और ग्यारह माह की बेटी खुशी है। दिलीप के भाई कमल सैनी ने बताया कि दिलीप सिंह रोज की तरह गुरुवार सुबह दुकान पर गए। गुरुवार रात करीब ग्यारह बजे वह दुकान बंद कर बाइक से अपने घर लौट रहे थे। उनके साथ बाइक पर एक युवक और सवार था। ताड़ीखाना चौराहे के पास नगर निगम के कर्मचारियों ने नाले की सफाई करने के बाद इसे खुला छोड़ दिया था। चूंकि यहां यह नाला सड़क के बीचों बीच निकल रहा है तो उस पर ढक्कन लगे हैं। वे हटाए पर वापस नहीं लगाए गए। ऐसे में दिलीप और उनका साथी बाइक समेत इसमें गिर गए। आस पड़ोस के लोगों ने दोनों को निकाल कर अस्पताल भिजवाया लेकिन देर रात दिलीप की मौत हो गई। कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि परिवार की ओर से इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। शुक्रवार रात ही जानकारी हो पाई है। उधर, दूसरे युवक की भी हालत खराब है।
यदि चेताने पर लगा देते ढक्कन तो न जाती दिलीप की जान
25 फरवरी के अंक में ही अमर उजाला ले प्रमुखता ने यह मामला उठाया था कि शहर में बिना योजना के काम हो रहा है। सड़कें खोद कर छोड़ दी जाती हैं। नाले खुले पड़े हैं। उसी नाले और ढक्कन का फोटो प्रकाशित कर हाकिमों को जगाने की कवायद की पर उनकी कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी। यदि टूट जाती और यह ढक्कन तत्काल लगा दिया जाता तो दिलीप की जान न जाती।
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मासूमों के आंसुओं का कौन देगा जवाब
तीन साल के बेटे लव और 11 माह की खुशी को तो ठीक से यह पता भी नहीं है कि क्या हो गया है। उनकी दुनिया वीरान हो गई है। हां, लव अपनी मां और अन्य परिजनों का रोना देखकर अवश्य रो रहा है। आखिर इन मासूमों के, दिलीप के परिजनों के इन आंसुओं का जवाब कौन देगा। क्या वे आला अधिकारी जवाब देंगे जो यह देखते ही नहीं कि शहर में क्या हो रहा है। हर जगह विकास कार्यों की बात कहकर इस तरह की लापरवाही हो रही है जो जानलेवा साबित होती है।
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