मुरादाबाद। देश के अलग अलग हिस्सों और प्रदेशों में फंसे श्रमिकों की स्पेशल ट्रेनों से घर वापसी कराई जा रही है, लेकिन मुरादाबाद के हॉट स्पॉट गलशहीद क्षेत्र में फंसे बिहार के 484 श्रमिक घर लौटने के लिए आस में अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि उनके पास न राशन बचा और न ही पैसा है। सभी श्रमिक भूखे प्यासे हैं। इनमें से तीन मजदूर शनिवार को कलक्ट्रेट पहुंचे और उन्होंने आपबीती सुनाई। उनका कहना है कि वह घर जाना चाहते हैं। लेकिन उन्न्हें कोई मदद नहीं मिल पा रही है।
बिहार के पूर्णिया जनपद के अलग अलग गांवों के रहने वाले 484 श्रमिक लॉक डाउन से पहले मेहनत मजदूरी करने मुरादाबाद आए थे। इनमें कोई रिक्शा चलाता था तो कोई कारखाने में कार्य करता था, लेकिन लॉक डाउन में सब कुछ बंद हो गया है। जब से ये लोग गलशहीद क्षेत्र के असालतपुरा में अलग अलग जगह रह रहे हैं। इनमें से तीन श्रमिक शनिवार को कलक्ट्रेट पहुंचे। इन्होंने ने बताया कि कुछ लोगों ने इन्हें सलाह दी थी कि सभी श्रमिकों की एक फाइल बनाकर तैयार की जाए। जिस पर श्रमिक का नाम, मोबाइल नंबर और उसका पता अंकित किया गया। पिछले इन तीन से ये मजदूर चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिल पाई है। एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के बीच घूम रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि उनका राशन और पैसा खत्म हो चुके हैं। कुछ दिन तक लोगों और प्रशासन की ओर से राशन मिला। लेकिन उन्होंने भी मदद करना बंद कर दिया है। मजदूरों का कहना है कि वह अपने घर जाना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि एक बार घर चले जाएं। इसके बाद कभी लौट कर नहीं आएंगे।